मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया: "ये | हिंदी विचार

"मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया: "ये (ग़ुलाम/सेवक) तुम्हारे भाई हैं,ईश्वर ने इन को तुम पर निर्भर कर दिया है,ईश्वर जिसके पास ऐसे सेवक को कर दे उसे चाहिए कि उस को वही खिलाये जो खुद खाता हो और वही पहनाए जो ख़ुद पहनता हो,और उस को किसी ऐसे काम पर मजबूर न करे जो उस के बस से बाहर हो।अगर ऐसा काम उस से ले जो उस के बस से बाहर हो तो ख़ुद उस काम में उसकी मदद करे।" (हदीस:बुख़ारी, मुस्लिम) ©Rashid Ameen Nadwi"

 मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया:

  "ये (ग़ुलाम/सेवक) तुम्हारे भाई हैं,ईश्वर ने इन को तुम पर निर्भर कर दिया है,ईश्वर जिसके पास ऐसे सेवक को कर दे उसे चाहिए कि उस को वही खिलाये जो खुद खाता हो और वही पहनाए जो ख़ुद पहनता हो,और उस को किसी ऐसे काम पर मजबूर न करे जो उस के बस से बाहर हो।अगर ऐसा काम उस से ले जो उस के बस से बाहर हो तो ख़ुद उस काम में उसकी मदद करे।"
          
                          (हदीस:बुख़ारी, मुस्लिम)

©Rashid Ameen Nadwi

मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया: "ये (ग़ुलाम/सेवक) तुम्हारे भाई हैं,ईश्वर ने इन को तुम पर निर्भर कर दिया है,ईश्वर जिसके पास ऐसे सेवक को कर दे उसे चाहिए कि उस को वही खिलाये जो खुद खाता हो और वही पहनाए जो ख़ुद पहनता हो,और उस को किसी ऐसे काम पर मजबूर न करे जो उस के बस से बाहर हो।अगर ऐसा काम उस से ले जो उस के बस से बाहर हो तो ख़ुद उस काम में उसकी मदद करे।" (हदीस:बुख़ारी, मुस्लिम) ©Rashid Ameen Nadwi

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