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#कविता  White हम तुम सदा साथ रहे 

तुम्हारी दुआओ में सदा सलामत रहूँ मैं,
तुम्हारा बना रहने के लिए।
पास तुम्हारे रहूं सदा- सदा मैं, 
तुम्हें ख़ुशी देने के लिए।।
पल भर भी ना रहूं तुमसे जुदा मैं,
ज़िंदा रहूँ बस तुम्हारी सलामती के लिए।
लड़ूं झगड़ू खूब बातें करूँ तुमसे मैं,
खूब करूँ देखभाल मुस्कराऊँ बस तुम्हारे लिए।।
मेरे होने का मतलब ही बस तुम हो 
और तुमसे ही हूँ मैं,
बस इतना काफी है, जिंदगी जीने के लिए।
हम तुम सदा साथ रहे, हर गम ख़ुशी में बदलने के लिए।।

©chahat

हम तुम

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 होली के रंग सी रंग लो खुशियां

होली के रंगों सी,रंग लो सारी खुशी।
जीवन में भर लो अरमान सारे इंद्रधनुषी।
जला दो अपने अंदर की बुराई सारी।
खिला लो रंग बिरंगे फूलों की बागियां प्यारी।।
न रखो कोई रंजिश मन में,
हटा दो शिकायतें सारी।
रंग लो प्यार के रंग जीवन में,
खिला दो प्यार की फुलवारी।।
पल भर को सही,
बसा लो एक दुनिया प्यारी।
जहां न हो रोक टोक,
सजा हो मन जैसे फूलो की क्यारी।।
हंस लो खुलकर यारों,
पता नही कब हो किसकी बारी।
भूल जाओ कुछ पल को,
सारी चिंता और जिम्मेदारी।।
पंख लगाकर उड़ जाओ।
पानी में रंगों से तुम घुल जाओ।।
बंद करके आंखो को सो जाओ।
सपनो में ही सही,
कभी खुद से भी मिल आओ।।।।

©chahat

#Holi

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 मर्यादाओं से परिपूर्ण ।
एक औरत की कहानी।।
संस्कारों से सजी धजी बनी।
ए नारी तेरी यही कहानी।।
हो दासी चाहे हो महलों की रानी।
हर औरत लिखती नई कहानी।।
करती संघर्ष बन वह कल्याणी।
माथे पे बिंदी ओजस्वमयी वाणी।।
शून्य से शिखर तक तेरी यही कहानी...
हर जगह हुनर के पंख फैलाती।
इंद्रधनुष से रंग बिखराती।।
धरती तू,सरिता तू, कहलाती।
पत्थर सी तू अडिग न डगमगाती।।
अपने अंदर कई रूप तू समाती।
धरा सी सहनशीलता दिखलाती।।
ममतामयी हो मोम सी पिघल जाती।
क्रोध करे तो रण चंडी सी बन जाती।।
पाप नाशिनी शेर वाहिनी तू कहलाती।
देख पापाचार तू काली सा रूप धारती।।
आज भी नारी हार नहीं मानती।
करती है सर्वनाश सिर्फ दहाड़ नही मारती।।
होकर आत्म निर्भर वो संहार नहीं मांगती।
चलती कदम मिला वो हार नहीं मानती।।
साड़ी में भी नारी आसमां छूने का अरमान खूब धरती है।
चांद पर पहुंचा चंद्रयान तब भी वो प्रधान रूप रखती है।।
वो ज्वाला बन सूरज सी जलती है।
वो शीतल बन चांद सी खिलती है।।
तपकर कर वह स्वर्ण रूप धरती है।
कोयला से भी वो हीरा बन चमकती है।।
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©chahat

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#womeninternational #womensday  आत्म निर्भरता से परिपूर्ण

मर्यादाओं से परिपूर्ण ।
एक औरत की कहानी।।
संस्कारों से सजी धजी बनी।
ए नारी तेरी यही कहानी।।
हो दासी चाहे हो महलों की रानी।
हर औरत लिखती नई कहानी।।
करती संघर्ष बन वह कल्याणी।
माथे पे बिंदी ओजस्वमयी वाणी।।
शून्य से शिखर तक तेरी यही कहानी...
हर जगह हुनर के पंख फैलाती।
इंद्रधनुष से रंग बिखराती।।
धरती तू,सरिता तू, कहलाती।
पत्थर सी तू अडिग न डगमगाती।।
अपने अंदर कई रूप तू समाती।
धरा सी सहनशीलता दिखलाती।।
ममतामयी हो मोम सी पिघल जाती।
क्रोध करे तो रण चंडी सी बन जाती।।
पाप नाशिनी शेर वाहिनी तू कहलाती।
देख पापाचार तू काली सा रूप धारती।।
आज भी नारी हार नहीं मानती।
करती है सर्वनाश सिर्फ दहाड़ नही मारती।।
होकर आत्म निर्भर वो संहार नहीं मांगती।
चलती कदम मिला वो हार नहीं मानती।।
साड़ी में भी नारी आसमां छूने का अरमान खूब धरती है।
चांद पर पहुंचा चंद्रयान तब भी वो प्रधान रूप रखती है।।
वो ज्वाला बन सूरज सी जलती है।
वो शीतल बन चांद सी खिलती है।।
तपकर कर वह स्वर्ण रूप धरती है।
कोयला से भी वो हीरा बन चमकती है।।

©chahat
 मेरी असली मुस्कान चाहिए

मेरी  कीमत नही जहां ,
नही वो आसमान चाहिए ।
न ऐसी छत,
न ऐसे जमीन चाहिए।।
मुझे मेरी मेहनत की कीमत,
मुझे मेरी असली मुस्कान चाहिए।।
जहां कद्र नहीं मेरे समर्पण की,
न ऐसे गहने,
न ऐसा मकान चाहिए।
थक गए अब जहां पैर मेरे ,
चलते चलते उनके मुझे निशान चाहिए।।
उन निशान पर मुझे मेरा सम्मान चाहिए।
मुझे मेरी आत्मनिर्भर पहचान चाहिए।।
जहान में एक जहां अपना चाहिए।
टूट गया जो अरमानों से भरा था
मुझे वापिस अपना वो सपना चाहिए।।
सारा दिन करके जब थक जाती हूं
खुद को भूलकर सबका कर जाती हूं
अब नही कोई हिसाब चाहिए।
बस मांगती हूं इतनी प्यार से भरी
वापिस अपनी मीठी थकान चाहिए।।

©chahat

मेरी असली मुस्कान चाहिए मेरी कीमत नही जहां , नही वो आसमान चाहिए । न ऐसी छत, न ऐसे जमीन चाहिए।। मुझे मेरी मेहनत की कीमत, मुझे मेरी असली मुस्कान चाहिए।। जहां कद्र नहीं मेरे समर्पण की, न ऐसे गहने, न ऐसा मकान चाहिए। थक गए अब जहां पैर मेरे , चलते चलते उनके मुझे निशान चाहिए।। उन निशान पर मुझे मेरा सम्मान चाहिए। मुझे मेरी आत्मनिर्भर पहचान चाहिए।। जहान में एक जहां अपना चाहिए। टूट गया जो अरमानों से भरा था मुझे वापिस अपना वो सपना चाहिए।। सारा दिन करके जब थक जाती हूं खुद को भूलकर सबका कर जाती हूं अब नही कोई हिसाब चाहिए। बस मांगती हूं इतनी प्यार से भरी वापिस अपनी मीठी थकान चाहिए।। ©chahat

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 सबकी सुनो ।
पर अपने दिमाग को
उसकी बातो से न बुनो।।
जो तुम्हे तुमसा न समझता हो।
न खुद को तकलीफ दो
ऐसे लोगो की वजह से
ऐसे रिश्तों की वजह से
जो तुम्हारे होने पर सवाल उठाता हो।।
तुम्हारे हसने बोलने करने या न करने पे
तुम्हे बेवजह सुनाते हो।
तुम्हारे अपने वजूद 
को क्यों किसी और को थमाते हो।।
खुद के लिए खुद खड़े हो तो जीलो।
जिंदगी छोटी सी है,कुछ बाते अमृत समझ पिलो।।
अनमोल लम्हों को खुश रखना सीखो।
जो करते है तुम्हे प्यार तुम्हे उन्हें चुनो।
सबकी सुनो
पर अपने आत्मसम्मान को
अपनो के आत्मविश्वास से बुनो।।

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सबकी सुनो । पर अपने दिमाग को उसकी बातो से न बुनो।। जो तुम्हे तुमसा न समझता हो। न खुद को तकलीफ दो ऐसे लोगो की वजह से ऐसे रिश्तों की वजह से जो तुम्हारे होने पर सवाल उठाता हो।। तुम्हारे हसने बोलने करने या न करने पे तुम्हे बेवजह सुनाते हो। तुम्हारे अपने वजूद को क्यों किसी और को थमाते हो।। खुद के लिए खुद खड़े हो तो जीलो। जिंदगी छोटी सी है,कुछ बाते अमृत समझ पिलो।। अनमोल लम्हों को खुश रखना सीखो। जो करते है तुम्हे प्यार तुम्हे उन्हें चुनो। सबकी सुनो पर अपने आत्मसम्मान को अपनो के आत्मविश्वास से बुनो।। ©chahat

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