Ashish Rathore

Ashish Rathore Lives in Gurugram, Haryana, India

Life is like a nobel, if one page is sad then another one will be happy..

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#Waqt  एक बात जो हर दम शताती है 
गर अब कहूं किश्शे
कोई समझने  बाला भी तो हो 

कभी लगता था जिनमे अपनापन 
अब वैसा कुछ नज़र न आता है

उन बातों में रात कब गुजर जाती 
ये पता ही न चलता था
कुछ बातें
 बिन बोले ही समझ जाते थे

प्यार सिद्दत इसका पता नहीं
हां अब उनकी बातो में
वो बात नज़र ना आती है

©Ashish Rathore

#Waqt

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उनको देखता हूं तो बस देखता जाता हूं इन आंखों का क्या भरोसा जनाब बंद होकर ये चांद को धुंधला कर देती है|| ©Ashish Rathore

#missingyou  उनको देखता हूं तो बस देखता जाता हूं 
इन आंखों का क्या भरोसा जनाब 
बंद होकर ये चांद को धुंधला कर देती है||

©Ashish Rathore

कोई तुम्हारा सफ़र पर गया तो पूछेंगे रेल देख के हम हाथ क्यों हिलाते हैं Tahzeeb Hafi ©Ashish Rathore

#lovebond  कोई तुम्हारा सफ़र पर गया तो पूछेंगे
रेल देख के हम हाथ क्यों हिलाते हैं
                       
                           Tahzeeb Hafi

©Ashish Rathore

#lovebond

12 Love

तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है बहोत, मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो तो फिर ये बताओ कि तुम उसकी आंखों के बारे में क्या जानते हो? ये ज्योग्राफियाँ, फ़लसफ़ा, साइकोलोजी, साइंस, रियाज़ी वगैरह ये सब जानना भी अहम है मगर उसके घर का पता जानते हो? Tehzeeb Hafi ©Ashish Rathore

#soulmate  तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है बहोत, मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो
तो फिर ये बताओ कि तुम उसकी आंखों के बारे में क्या जानते हो?
ये ज्योग्राफियाँ, फ़लसफ़ा, साइकोलोजी, साइंस, रियाज़ी वगैरह
ये सब जानना भी अहम है मगर उसके घर का पता जानते हो?
Tehzeeb Hafi

©Ashish Rathore

#soulmate

15 Love

follow the blues ©Ashish Rathore

#bleedblue  follow the blues

©Ashish Rathore

#bleedblue

8 Love

बेगानी डगर और ये आलम सुहाना हर एक मोड़ पर है ये पागल दीवाना | कहां को चले थे कहां पर है जाना हर एक मोड़ देता है मंजर सुहाना || कभी रेत के टीलों सा है ये बेगाना कभी चांदनी रात का है दीवाना | अजब से भंवर  में फंसे जा रहे हैं ना पीछे  डगर है ना आगे सवेरा || भटकते भटकते कहीं दूर तक जब चले थे किसी की राहों में हम | फस गए इस कदर हम उसी राह पे न कस्ती बची थी न कोई किनारा || ©Ashish Rathore

#Journey  बेगानी डगर और ये आलम सुहाना
हर एक मोड़ पर है ये पागल दीवाना |
कहां को चले थे कहां पर है जाना
हर एक मोड़ देता है मंजर सुहाना ||
कभी रेत के टीलों सा है ये बेगाना
कभी चांदनी रात का है दीवाना |
अजब से भंवर  में फंसे जा रहे हैं
ना पीछे  डगर है ना आगे सवेरा ||
भटकते भटकते कहीं दूर तक
जब चले थे किसी की राहों में हम |
फस गए इस कदर हम उसी राह पे
न कस्ती बची थी न कोई किनारा ||

©Ashish Rathore

#Journey

9 Love

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