अद्वैतवेदान्तसमीक्षा

अद्वैतवेदान्तसमीक्षा Lives in Haridwar, Uttarakhand, India

(सभी विषयों से रिक्त मन होना ही आत्मदर्शन का उत्तम व अंतिम उपाय है )अथात आदेशो नेति नेति न ह्येतस्मादिति नेत्यन्यत् परमस्ति(बृह.उपनिषद 2/3/6)

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#विचार

नाकुछ से वे कोहिनूर बन गए। जिसने रखा हौसला वे ही तो मशहूर हो गए।।

5 Love

कबीर संगति साध की , कड़े न निर्फल होई । चन्दन होसी बावना , नीब न कहसी कोई ॥ अर्थ: कबीर कहते हैं कि साधु की संगति कभी निष्फल नहीं होती. चन्दन का वृक्ष यदि छोटा – (वामन – बौना ) भी होगा तो भी उसे कोई नीम का वृक्ष नहीं कहेगा. वह सुवासित ही रहेगा और अपने परिवेश को सुगंध ही देगा. आपने आस-पास को खुशबू से ही भरेगा

 कबीर संगति साध की , कड़े न निर्फल होई ।

चन्दन होसी बावना , नीब न कहसी कोई ॥






अर्थ: कबीर कहते हैं कि साधु  की संगति कभी निष्फल नहीं होती. चन्दन का वृक्ष यदि छोटा – (वामन – बौना ) भी होगा तो भी उसे कोई नीम का वृक्ष नहीं कहेगा. वह सुवासित ही रहेगा  और अपने परिवेश को सुगंध ही देगा. आपने आस-पास को खुशबू से ही भरेगा

कबीर संगति साध की , कड़े न निर्फल होई । चन्दन होसी बावना , नीब न कहसी कोई ॥ अर्थ: कबीर कहते हैं कि साधु की संगति कभी निष्फल नहीं होती. चन्दन का वृक्ष यदि छोटा – (वामन – बौना ) भी होगा तो भी उसे कोई नीम का वृक्ष नहीं कहेगा. वह सुवासित ही रहेगा और अपने परिवेश को सुगंध ही देगा. आपने आस-पास को खुशबू से ही भरेगा

3 Love

खुशबू *जिंदगी सुंदर है पर मुझे.* *जीना नहीं आता,* *हर चीज में नशा है पर मुझे.* *पीना नहीं आता,* *चाहे कोई इसके बिना. जी सकते हैं,* *पर मुझे "माँ नर्मदा या गंगा" के बिना. जीना* नहीं आता,*

#कविता  खुशबू *जिंदगी  सुंदर  है  पर मुझे.*
     *जीना  नहीं  आता,*
*हर  चीज  में  नशा  है  पर मुझे.*
     *पीना  नहीं  आता,*
*चाहे कोई इसके बिना.  जी  सकते  हैं,*
*पर मुझे "माँ नर्मदा या गंगा" के  बिना. जीना* नहीं  आता,*

माँ रेवा व गंगा

9 Love

हम, भारत के लोग एसा मानते हैं कि- Speaking lips can reduce any problem close lips avoid some problem but smiling lips can solve any problem forever? बोलने वाले होंठ किसी भी समस्या को कम कर सकते हैं बंद होंठ कुछ समस्या से बचते हैं लेकिन मुस्कुराते हुए होंठ किसी भी समस्या को हमेशा के लिए हल कर सकते है। अतः एव राष्ट्रीय चिन्ह में अशोक का अर्थ प्रसन्नता ही है क्योंकि शोक का विलोम प्रसन्नता ही होता है

 हम, भारत के लोग                  एसा मानते हैं कि-
Speaking lips can reduce any problem close lips avoid some problem but smiling lips can solve any problem forever?
बोलने वाले होंठ किसी भी समस्या को कम कर सकते हैं बंद होंठ कुछ समस्या से बचते हैं लेकिन मुस्कुराते हुए होंठ किसी भी समस्या को हमेशा के लिए हल कर सकते है।
अतः एव राष्ट्रीय चिन्ह में अशोक का अर्थ प्रसन्नता ही है क्योंकि शोक का विलोम प्रसन्नता ही होता है

भारतीय विचार पद्धति

10 Love

दुर्जन से मित्रता और शत्रुता दोनों ही कष्टप्रद ...... सुभाषित " दुर्जनेन समं सख्यं द्वेषम चापि न कारयेत | उष्णो दहति चान्गारः शीतः कृष्णायते करम || " अर्थात - " दुर्जन व्यक्ति से न तो मित्रता करनी चाहिए , न शत्रुता ही | जिस प्रकार ज्वलंत अंगारे को स्पर्श करने से वह हाथ को जलाती है तथा बुझने के पश्चात् उसको स्पर्श करने से वह हाथ को काला कर देती है , ठीक उसी प्रकार दुर्जन की मित्रता अनापेक्षित दुष्परिणामों को तथा उसकी शत्रुता विविध कुपरिणामों को उत्पन्न कर मनुष्य को कष्ट देती है

#कविता  दुर्जन से मित्रता और शत्रुता दोनों ही कष्टप्रद ......
                                                सुभाषित


                    " दुर्जनेन समं सख्यं द्वेषम चापि न कारयेत | 
                     उष्णो दहति चान्गारः शीतः कृष्णायते करम || "


अर्थात -     " दुर्जन व्यक्ति से न तो मित्रता करनी चाहिए , न शत्रुता ही | जिस प्रकार ज्वलंत अंगारे को स्पर्श करने से वह हाथ को जलाती है तथा बुझने के पश्चात् उसको स्पर्श करने से वह हाथ को काला कर देती है , ठीक उसी प्रकार दुर्जन की मित्रता अनापेक्षित दुष्परिणामों को तथा उसकी शत्रुता विविध कुपरिणामों  को उत्पन्न कर मनुष्य को कष्ट देती है

दुर्जन से दूरी का शास्रीय माप

6 Love

राहें उद्यमेन हि सिध्यन्ति कार्याणि न मनोरथैः | नहि सुप्तस्य सिंहस्य प्रविशन्ति मुखे मृगाः || - सुभषितरत्नाकर भावार्थ - निरन्तर उद्यम करने से ही विभिन्न कार्य सम्पन्न (सिद्ध) होते हैं न कि मात्र मनोरथ (इच्छा) करने से | निश्चय ही एक सोये हुए सिंह के मुख में हिरण स्वयं प्रविष्ट नहीं होते हैं | (एक सिंह को भी अपनी भूख मिटाने के लिये प्रयत्न पूर्वक हिरणों का पीछा कर उनका वध करना पडता है | निष्क्रिय व्यक्तियों की की तुलना एक सोये हुए सिंह से कर इस सुभाषित में उद्यमिता के महत्व को प्रतिपादित किया गया है ।. Udyamena = by continuous and strenuous efforts, Hi= surely. Sidhyanti = are accomplished. Kaaryaani = various tasks Na = not. Manorathaih= by simply desiring. Nahi = by no means. Suptasya = sleeping. Simhasya = a loin's Pravishanti = enter, Mukhe = mouth. Mrugaah = antelopes. i.e. We can accomplish var

#कविता  राहें उद्यमेन हि सिध्यन्ति कार्याणि  न मनोरथैः  |
नहि सुप्तस्य सिंहस्य प्रविशन्ति मुखे  मृगाः || - सुभषितरत्नाकर  

भावार्थ -    निरन्तर उद्यम करने से ही विभिन्न कार्य सम्पन्न 
(सिद्ध) होते हैं न कि मात्र मनोरथ (इच्छा) करने से | निश्चय  ही 
एक  सोये हुए सिंह  के मुख  में हिरण  स्वयं प्रविष्ट नहीं  होते  हैं | 
(एक सिंह को भी अपनी भूख मिटाने के लिये प्रयत्न पूर्वक हिरणों 
का पीछा कर उनका  वध करना पडता है | निष्क्रिय व्यक्तियों की 
की तुलना एक सोये हुए सिंह से कर  इस सुभाषित में उद्यमिता  के  
महत्व को प्रतिपादित किया गया  है ।.
Udyamena = by continuous and strenuous efforts,  
Hi= surely.    
Sidhyanti =  are accomplished.      
 Kaaryaani = various tasks    
Na = not.    
 Manorathaih= by simply desiring.   
 Nahi = by no
means.     
  Suptasya = sleeping.                 
Simhasya = a loin's 
Pravishanti = enter,    
Mukhe =  mouth.  
Mrugaah = antelopes.
i.e.               We can accomplish var

प्रयत्न का महत्व

10 Love

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