Shalvi Singh

Shalvi Singh Lives in Velha Goa, Goa, India

Follow me on YouTube for more poetries & Psychological knowledge, podcasts👇👇👇शाल्वी सिंह एक क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट हैं। वे करीब दो साल से लिख रही हैं। उनकी कई कविताएं प्रकाशित एवं संकलित भी हुई हैं, जैसे की कई किताबों और अखबारों के माध्यम से उन्हें अपनी कविताओं को काफी आगे बढ़ाने का मौका भी मिलता रहा है। इन्होंने कई निबंध प्रतियोगिताओं में भी सर्वोच्चम पद हासिल कर खुद की श्रेणी बनाई है। ये अभी तक काफ़ी विषयों पे लिखती आयी हैं। इनकी प्रमुख कविताएं आपको इनके यूट्यूब पे मिल सकती हैं। इनकी ख़ास कविताओं में अभी तक, 'देह हूँ मैं', 'वो प्यार का पहला एहसास', 'प्यार से दोस्ती का सफ़र', 'ईर्ष्या', 'ये कविता है हिन्द-ऐ-हिंदुस्तान की', 'वो मासूम ख्वाइश', 'समय', 'घर आई एक नन्ही परी', 'दूर कहीं झरनों की बौछारे', 'तुम्हारी सम्पूर्ण स्मृतियाँ', 'दास्तान-ऐ-सफ़र', 'किसी से ज़िक्र', 'शाम-ऐ-पहर', 'डर लगता है', 'तुम मैं और मैं तुम बनजाएँ', आदि कविताएँ रही है। उसके अलावा हाल ही में लघुतम कविताएँ, नाटक और कई तरह के विषयों पे भी काम कर रही हैं। इन्हें गाने का भी शौक है, जो इनकी कविताओं को भी आवाज़ देने में पूरा साबित होता है। इन्हें लोगो के साथ मिलनसार होने का भी बड़ा शौक़ है, जो इन्हें व्यक्तिगत बहुत प्रभवित करता है।

https://www.youtube.com/@iwrit_ewhatyouthink

  • Latest
  • Popular
  • Video
#iwrit_ewhatyouthink

"हर इंसान के भाव और उसके सोचने समझने की छमता वक़्त के साथ बदलती रहती है। तो क्या हुआ अगर आप देर से महसूस कर पाए। फर्क तब पड़ता, जब आप किसी से प्रतिस्पर्धा में हार गए हो। लेकिन हर समय खुद की कमजोरियों में दोष देना खुद को पाँच कदम और पीछे कर देता है। इसीलिए चुनौतिओं को लालकारियें नही बल्कि अपनी कमजोरियों पर, नाकामियों पर धीरे धीरे ही सही लेकिन निरंतर प्रयास ज़ारी रखिये। फिर आप खुद देखेंगे कि कितना आसान है न! आपने मन के भावों को समझना और उसकी कमजोरियों पर खुद के छमता अनुसार काम करना।" "Every person's feelings, as well as his or her ability to comprehend and understand, change with time. So what if you realised it was too late? It would have been significant if you had lost the competition to someone else. But constantly blaming your own flaws sets you back five steps. That is why, rather than challenging the problems, continue to work on your flaws and mistakes slowly but consistently. Then you can see for yourself how simple it is! Understanding your mind's feelings and working on your weaknesses according to your abilities." Shalvi Singh (Counselling Psychologist) #iwrit_ewhatyouthink

72 View

#iwrit_ewhatyouthink

Shalvi Singh Psychologist: *Do a U-turn whenever possible because your life needs a little heart change* Shalvi Singh Psychologist: *जब भी संभव हो यू-टर्न लें क्योंकि आपके जीवन में थोड़े से हृदय परिवर्तन की आवश्यकता है*

405 View

#iwrit_ewhatyouthink #nojohindi

Arz foundation organized a sex trafficking campaign in that I performed my poetry Deh hoon mai *देह हूँ मैं* कविता, जो अन्याय हो रहे इस समाज की व्यवस्था, औरतों के प्रति लोगों की सोच को दर्शाती है। इस कविता के माध्यम से मैं शाल्वी सिंह, एक मनोवैज्ञानिक की छात्रा आप सब को लोगों से जुड़ा वो आईना सुनाना चाहती हूं जो हमारी समझ से परे हो चुका है। यहाँ देखते तो सब हैं, समझते भी खूब हैं, पर गौर करने की बात ये है की वे लोग कौन है? जो ये समझ नही पा रहे कि इस तरह सरे आम एक स्त्री की इज़्ज़त नीलाम हो रही, हर जगह, हर दिन, हर घंटे। बहुत दुखत है सबकुछ लोग नही समझ सकते कि एक औरत पे क्या बीतती है, जब वे ऐसे लोगों के जाल में फंस, किसी नौकरी के झूठे ढकोसलों में फंसकर रह जाती। कोई नही सोचता ऐसे मुज़रिमो के बारे में, और रही एक औरत से जुड़ी बातें तो वे सह-सहकर एक दिन इतनी मजबूत हो जाती कि फिर उसे फर्क ही नही पड़ता कि उसके साथ क्या हो रहा, लेकिन इसका मतलब ये नही की आप लोग चुपचाप बैठे रहें। मेरी आज की कविता एक, बल्कि कई औरतों का विलाप है। जो ऐसे ही किसी मंज़र की शिकार होते झलक रही, उनका दर्द, उनकी पीड़ा आपको मेरी कविता में जरूर सुनने को, पढ़ने को मिलेगी। आशा करती हूँ, आपको सीख मिलेगी। #iwrit_ewhatyouthink #nojohindi

99 View

#iwrit_ewhatyouthink #landscape #Quotes  *मैं भी एक रंग हूँ*

यूं हँसते हुए कभी विरह 
की अनुभूति हुई है! 
हर दिन सुख की चाहत 
पाने में कितना दुःखी हुए! 
जो हर पल नई आशा और 
उमंग के सहारे जी रहे हो! 

जो ईश्वर द्वारा निर्मित रंग 
मंच का 'मैं भी एक रंग हूं!' 
कह रहे हो। 
















_शाल्वी सिंह_
iwrit_ewhatyouthink

©Shalvi Singh

#landscape *मैं भी एक रंग हूँ* यूं हँसते हुए कभी विरह की अनुभूति हुई है! हर दिन सुख की चाहत पाने में कितना दुःखी हुए! जो हर पल नई आशा और उमंग के सहारे जी रहे हो!

198 View

#iwrit_ewhatyouthink
#ChainSmoking #Quotes  मेरा दिल पहाडों में कहीं खो गया!

©Shalvi Singh

#ChainSmoking

189 View

Trending Topic