Monika verma

Monika verma Lives in Jodhpur, Rajasthan, India

In the era of fake people, I fall in love with pen_paper.....

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जब जिंदगी एक कमरे में बिताई जाए, पानी पी कर भूख मिटाई जाए, तब मां याद आती हैं। जब आंख अंधेरे में खुल जाए, कोई आस पास नजर नहीं आए, तब मां याद आती हैं। जब अकेलापन जकड़ जाए, नए शहर में कोई रिश्ता नजर नहीं आए, तब मां याद आती हैं। जब पेट में भूख शोर मचाए, खाने को रोटी कम पड़ जाए, तब मां याद आती हैं। जब दवाई बेअसर हो जाए, सिरहाना एक हाथ की छुअन को तरस जाए, तब मां याद आती हैं। -मोनिका वर्मा 21.01.2024 ©Monika verma

#मां_याद_आती_हैं #MOTHERSLOVE #मां #rosepetal #Mom❤  जब जिंदगी एक कमरे में बिताई जाए,
पानी पी कर भूख मिटाई जाए,
तब मां याद आती हैं।

जब आंख अंधेरे में खुल जाए,
कोई आस पास नजर नहीं आए,
तब मां याद आती हैं।

जब अकेलापन जकड़ जाए,
नए शहर में कोई रिश्ता नजर नहीं आए,
तब मां याद आती हैं।

जब पेट में भूख शोर मचाए,
खाने को रोटी कम पड़ जाए,
तब मां याद आती हैं।

जब दवाई बेअसर हो जाए,
सिरहाना एक हाथ की छुअन को तरस जाए,
तब मां याद आती हैं।
                                 -मोनिका वर्मा
                                   21.01.2024

©Monika verma

बेहतरीन की तलाश में, इक उम्र गुजारने के बाद, बेहतरीन पल, बेहतरीन कल, बेहतरीन सफर, बेहतरीन हमसफर, बेहतरीन जिंदगी....... और फिर, ख्वाइशों की अगली सीढ़ी पर, शुरू हो जाता हैं, बेहतरीन से बेहतरीन, नुक्स निकालने का सिलसिला.... और फिर एक एक करके, बेहतरीन जिंदगी के, बेहतरीन सफर में, बेहतरीन कल, बेहतरीन पल, और बेहतरीन हमसफर, सबका अंत हो जाता हैं। #मोनिका वर्मा 12.01.2024 ©Monika verma

#poem✍🧡🧡💛 #मोनिका #कविता #ankahe_jazbat #ankaha_ehsaas  बेहतरीन की तलाश में, 
इक उम्र गुजारने के बाद,
बेहतरीन पल,
बेहतरीन कल,
बेहतरीन सफर,
बेहतरीन हमसफर,
बेहतरीन जिंदगी.......
और फिर, 
ख्वाइशों की अगली सीढ़ी पर,
शुरू हो जाता हैं,
बेहतरीन से बेहतरीन, 
नुक्स निकालने का सिलसिला....
और फिर एक एक करके,
बेहतरीन जिंदगी के,
बेहतरीन सफर में,
बेहतरीन कल, 
बेहतरीन पल,
और बेहतरीन हमसफर,
सबका अंत हो जाता हैं।
        #मोनिका वर्मा
        12.01.2024

©Monika verma

समय एक अरसे से बंद पड़ी एक किताब हैं, कहीं पर अक्षर धुंधले तो कहीं पर पन्ने खराब हैं। पाई पाई से जुड़कर खनकते हुए ये सिक्के, पूछते मुझसे पाई पाई का हिसाब हैं। मिलो किसी मोड़ पर तो बन जाना अजनबी फिर से, ये न पूछना कि नजरंदाजी किस प्रश्न का जवाब हैं। चुप रहना कोई जुर्म कुबूल करना तो नहीं होता, कभी परदे का ख्याल हैं तो कभी उम्र का लिहाज हैं। चमकते शीशों में भी देखी हैं कई दरारें मैने, निशानेबाज की मेहरबानी से उठते पत्थरों पर सवाल हैं। तुम्हारे हुनर कौन तराशेगा इस भरी महफिल में, नोट बिखरे तो नाचेंगे सिक्के इरशाद हैं, इरशाद हैं। #मोनिका वर्मा 04.01.24 ©Monika verma

#मोनिका #poetry_by_heart #ankahe_alfaaz #ankahe_jazbat #ankaha_ehsaas  समय एक अरसे से बंद पड़ी एक किताब हैं,
कहीं पर अक्षर धुंधले तो कहीं पर पन्ने खराब हैं।

पाई पाई से जुड़कर खनकते हुए ये सिक्के,
पूछते मुझसे पाई पाई का हिसाब हैं।

मिलो किसी मोड़ पर तो बन जाना अजनबी फिर से,
ये न पूछना कि नजरंदाजी किस प्रश्न का जवाब हैं।

चुप रहना कोई जुर्म कुबूल करना तो नहीं होता,
कभी परदे का ख्याल हैं तो कभी उम्र का लिहाज हैं।

चमकते शीशों में भी देखी हैं कई दरारें मैने,
निशानेबाज की मेहरबानी से उठते पत्थरों पर सवाल हैं।

तुम्हारे हुनर कौन तराशेगा इस भरी महफिल में,
नोट बिखरे तो नाचेंगे सिक्के इरशाद हैं, इरशाद हैं।
                                          #मोनिका वर्मा
                                          04.01.24

©Monika verma

इक अरसे बाद बच्चे अकेले नहीं रहते हैं। जरूरतें साथ साथ चलती हैं, फिक्रमंद हो जाते हैं, बाप की कमाई के लिए, मां की दवाई के लिए, छोटे की पढ़ाई के लिए, इक अरसे बाद बच्चे डरना भूल जाते हैं। अकेले चलना सीख जाते हैं, हालातों में ढलना सीख जाते हैं, गिरने पर चोट नहीं लगती, अंधेरों में नींद नहीं खुलती, खाली पेट भूख नहीं लगती, एक अरसे बाद बच्चे खुद बच्चे नहीं रहते हैं। अपनी कोई ख्वाइश नहीं रहती, किसी से कोई फरमाइश नहीं रहती, रोने पे आंसू नहीं आते हैं, सुबह का खाना शाम को खाते हैं, दर्द सारे एक मौन में छुपाते हैं, इक अरसे बाद बच्चे अकेले नहीं रहते हैं। इक अरसे बाद बच्चे डरना भूल जाते हैं। एक अरसे बाद बच्चे खुद बच्चे नहीं रहते हैं। #मोनिका वर्मा 03.12.2023 ©Monika verma

#मोनिका #कविता #responsibility #Expectations #experience  इक अरसे बाद बच्चे अकेले नहीं रहते हैं।
जरूरतें साथ साथ चलती हैं,
फिक्रमंद हो जाते हैं,
बाप की कमाई के लिए,
मां की दवाई के लिए,
छोटे की पढ़ाई के लिए,
इक अरसे बाद बच्चे डरना भूल जाते हैं।
अकेले चलना सीख जाते हैं,
हालातों में ढलना सीख जाते हैं,
गिरने पर चोट नहीं लगती,
अंधेरों में नींद नहीं खुलती,
खाली पेट भूख नहीं लगती, 
एक अरसे बाद बच्चे खुद बच्चे नहीं रहते हैं।
अपनी कोई ख्वाइश नहीं रहती,
किसी से कोई फरमाइश नहीं रहती,
रोने पे आंसू नहीं आते हैं,
सुबह का खाना शाम को खाते हैं,
दर्द सारे एक मौन में छुपाते हैं,
इक अरसे बाद बच्चे अकेले नहीं रहते हैं।
इक अरसे बाद बच्चे डरना भूल जाते हैं।
एक अरसे बाद बच्चे खुद बच्चे नहीं रहते हैं।
                                     #मोनिका वर्मा
                                     03.12.2023

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शिकायतें कुछ कम हो गई हैं, कुछ थम सी गई हैं, कुछ शिकायतें जम सी गई हैं। कुछ आहट सी हो गई हैं, कुछ राहत सी हो गई हैं, कुछ शिकायतें घबराहट सी हो गई हैं। कुछ चुप चुप सी हैं, कुछ तार तार हो गई हैं, कुछ तो होते हुए भी बेकार हो गई हैं। कुछ मौन हो गई हैं, कुछ शोर हो गई हैं, कुछ होते होते कुछ और हो गई हैं। कुछ गुम हो गई हैं, कुछ आम हो गई हैं, कुछ शिकायतें बदनाम हो गई हैं। कुछ उलझ गई हैं, कुछ वीरान हो गई हैं, कुछ सुलझते सुलझते सुनसान हो गई हैं। #मोनिका वर्मा ©Monika verma

#शिकायतें #मोनिका  शिकायतें

कुछ कम हो गई हैं,
कुछ थम सी गई हैं,
कुछ शिकायतें जम सी गई हैं।
कुछ आहट सी हो गई हैं,
कुछ राहत सी हो गई हैं,
कुछ शिकायतें घबराहट सी हो गई हैं।
कुछ चुप चुप सी हैं,
कुछ तार तार हो गई हैं,
कुछ तो होते हुए भी बेकार हो गई हैं।
कुछ मौन हो गई हैं,
कुछ शोर हो गई हैं,
कुछ होते होते कुछ और हो गई हैं।
कुछ गुम हो गई हैं,
कुछ आम हो गई हैं,
कुछ शिकायतें बदनाम हो गई हैं।
कुछ उलझ गई हैं,
कुछ वीरान हो गई हैं,
कुछ सुलझते सुलझते सुनसान हो गई हैं।
                        #मोनिका वर्मा

©Monika verma

किसी देवी की मूरत सी हैं वो, मंदिर में पूजा भी करती है। वो मां हैं मेरी, परछाई बन कर हमेशा मेरे साथ चलती हैं। किसी इत्र की महक से भी ज्यादा तेरी दुआओं की खुशबू हैं, लोग कहते हैं कि तेरी किस्मत बहुत तेज चमकती हैं। किसी चांद की चांदनी सी खूबसूरत, वो मंद मंद मुस्काती हैं। मेरी मां में मुझे हर जन्म की जन्नत नजर आती हैं। मेरे हिस्से की खुशियों को वो कुछ ऐसे महफूज रखती हैं, कभी मेरी नजर उतारती तो कभी मंदिर में पूजा करती हैं। किसी बेजान घड़ी सी मेरी मां थक कर भी नहीं थकती हैं वो मां हैं मेरी, परछाई बन कर हमेशा मेरे साथ चलती हैं। - मोनिका वर्मा - 19.09.2023 ©Monika verma

#कविता #motherlove #kitaab  किसी देवी की मूरत सी हैं वो, मंदिर में पूजा भी करती है।
वो मां हैं मेरी, परछाई बन कर हमेशा मेरे साथ चलती हैं।
किसी इत्र की महक से भी ज्यादा तेरी दुआओं की खुशबू हैं,
लोग कहते हैं कि तेरी किस्मत बहुत तेज चमकती हैं।
किसी चांद की चांदनी सी खूबसूरत, वो मंद मंद मुस्काती हैं।
मेरी मां में मुझे हर जन्म की जन्नत नजर आती हैं।
मेरे हिस्से की खुशियों को वो कुछ ऐसे महफूज रखती हैं,
कभी मेरी नजर उतारती तो कभी मंदिर में पूजा करती हैं।
किसी बेजान घड़ी सी मेरी मां थक कर भी नहीं थकती हैं
वो मां हैं मेरी, परछाई बन कर हमेशा मेरे साथ चलती हैं।
                                             - मोनिका वर्मा
                                             - 19.09.2023

©Monika verma

#motherlove ❤️ #kitaab

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