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दिल कर रहा है ठहर जाऊँ... पर, असल सफर तो अब शुरू हुआ है जिंदगी का एक कदम बढ़ा है उस ओर.. पर दिल कर रहा है ठहर जाऊँ...! By-Lata_Sahu

 दिल कर रहा है ठहर जाऊँ...         
  पर,                              
                               असल सफर तो अब शुरू हुआ है जिंदगी का

एक कदम बढ़ा है उस ओर..              

पर दिल कर रहा है ठहर जाऊँ...! 
                                                  By-Lata_Sahu

# सफर...!!!!

8 Love

वक्त ले जा रहा है कहीं ओर.... उस और जिसको वक्त है अभी आने में... इस वक्त खुद से मिल रही हूं.. पर खुद के लिए उसे ढूंढ रही हूं.. मिला नहीं है.. पर कहीं तो है.... वक्त है अभी... वो वक्त आने मे...!!

 वक्त ले जा रहा है                      
                कहीं ओर....
उस और जिसको वक्त है                
                         अभी आने में...
   इस वक्त खुद से मिल रही हूं..             
                      पर खुद के लिए उसे ढूंढ रही हूं..
मिला नहीं है..                             
               पर कहीं तो है....
वक्त है अभी... वो वक्त आने मे...!!

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10 Love

मैं ढूंढ रही हूं खुद को पर , खुद में खो नहीं पा रही नहीं खोना चाहती बाकी दुनिया में पर , खुद की दुनिया बसा नहीं पा रही जरूरत नहीं हो किसी की पर ,अपनी जरूरत खुद को नहीं बना पा रही हूँ लोगों के बीच पर , खुद को अलग नहीं कर पा रही सीख रही हूं खुद में जीना पर , ऐसे जी नहीं रही मंजिल तय हो गई है पर , सफर के रास्ते ढूंढ नहीं पा रही भाग रही हूं दुनिया की जिंदगी से पर , अपनी जिंदगी अपने लिए बना रही । #Soul_Care #Me Lata_Sahu💚

#Always_A_Free_Spirit #self_love #Soul_Care #me  मैं ढूंढ रही हूं खुद को
पर , खुद में खो नहीं पा रही 
नहीं खोना चाहती बाकी दुनिया में
पर , खुद की दुनिया बसा नहीं पा रही
जरूरत नहीं हो किसी की
पर ,अपनी जरूरत खुद को नहीं बना पा रही
 हूँ लोगों के बीच
पर , खुद को अलग नहीं कर पा रही
सीख रही हूं खुद में जीना
पर , ऐसे जी नहीं रही
मंजिल तय हो गई है
पर , सफर के रास्ते ढूंढ नहीं पा रही
भाग रही हूं दुनिया की जिंदगी से
पर , अपनी जिंदगी अपने लिए बना रही ।
                                      #Soul_Care
                               #Me
                                            Lata_Sahu💚
#myvoice

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[" मानवता में असुर"] " फेक रहे हैं पत्थर असुर बनकर बुला रहे हैं मौत को स्वयं यमदूत बनकर" " शर्म नहीं आई तुम्हें हैवानियत की सीमा पार कर लान्ग कराए थे स्वयं भगवान अपने कर्तव्य भूमि पार कर" " बंद है आज हर धर्म की चार दिवारी खुले हैं केवल आज भगवान के दूतों की कर्तव्य की चार दीवारी" " हैवान भी पखार थे हैं भगवान के चरण स्वयं भगवान के दूत आए थे लेकर अपने चरण" " फेके हैं पत्थर , ठुकरा दिया तुमने जीवन को हो नहीं तुम उस लायक अब बचा जाए तुम्हारे जीवन को" " बिक गई आज मानवता पत्थरों के मौल नहीं रहा तुम्हें अपने जीवन का भी मौल" " भगवान के दूत आए थे जीवन लेकर तुम भागे अपने हाथों मौत का बुझा हुआ दीपक लेकर" " आया है तुम्हारे कर्मों का साया लौट कर पर नहीं तुम्हें चाहिए ही नहीं , आए तुम्हारा जीवन लौट कर" " बचाने आए थे वो मानव प्रजाति को बन कर दिखा दिया तुमने असुर उनको" " हो ही नहीं मानव , कलंक हो मानवता के नाम पर इन्हीं असुरी कर्मों की वजह से बरस रहा कहर पृथ्वी पर" " क्या हासिल कर लिया तुमने उछाल दिया जीवन को सिक्कों की तरह जैसे उछाल था अपने हाथों एक एक पत्थर को जिस तरह" " मौत निश्चित नहीं थी दे मारी लात तुमने अपने ही जीवन को अब मौत निश्चित है लगा लो एड़ी से चोटी तक का जोड़ बचाकर दिखाओ अपने जीवन को" [" सहायता नहीं ली तुमने निस्वार्थ डॉक्टरों की करके दिखाना अब तुम स्वयं की सहायता , खड़े हैं वो आज भी निस्वार्थ बनकर ही"] By-Lata Sahu

#मानवता_में_असुर #poem  [" मानवता में असुर"]
" फेक रहे हैं पत्थर असुर बनकर
बुला रहे हैं मौत को स्वयं यमदूत बनकर"
" शर्म नहीं आई तुम्हें हैवानियत की सीमा पार कर
लान्ग कराए थे स्वयं भगवान अपने कर्तव्य भूमि पार कर"
" बंद है आज हर धर्म की चार दिवारी 
खुले हैं केवल आज भगवान के दूतों की कर्तव्य की चार दीवारी"
" हैवान भी पखार थे हैं भगवान के चरण
स्वयं भगवान के दूत आए थे लेकर अपने चरण"
" फेके हैं पत्थर , ठुकरा दिया तुमने जीवन को
हो नहीं तुम उस लायक अब बचा जाए तुम्हारे जीवन को"
" बिक गई आज मानवता पत्थरों के मौल
नहीं रहा तुम्हें अपने जीवन का भी मौल"
" भगवान के दूत आए थे जीवन लेकर
तुम भागे अपने हाथों मौत का बुझा हुआ दीपक लेकर"
" आया है तुम्हारे कर्मों का साया लौट कर
पर नहीं तुम्हें चाहिए ही नहीं , आए तुम्हारा जीवन लौट कर"
" बचाने आए थे वो मानव प्रजाति को
बन कर दिखा दिया तुमने असुर उनको"
" हो ही नहीं मानव , कलंक हो मानवता के नाम पर
इन्हीं असुरी कर्मों की वजह से बरस रहा कहर पृथ्वी पर"
" क्या हासिल कर लिया तुमने उछाल दिया जीवन को सिक्कों की तरह
जैसे उछाल था अपने हाथों एक एक पत्थर को जिस तरह"
" मौत निश्चित नहीं थी दे मारी लात तुमने अपने ही जीवन को
 अब मौत निश्चित है लगा लो एड़ी से चोटी तक का जोड़ बचाकर दिखाओ अपने जीवन को"
[" सहायता नहीं ली तुमने निस्वार्थ डॉक्टरों की करके  दिखाना अब तुम स्वयं की सहायता , खड़े हैं वो आज भी निस्वार्थ बनकर ही"]
                                                                   By-Lata Sahu

#मानवता_में_असुर भगवान कभी माफ नहीं करेगा इन्हें, फेके हैं इन्होंने पत्थर भगवान के दूत पर ही।

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