Dr.Govind Hersal

Dr.Govind Hersal Lives in Jaipur, Rajasthan, India

Ayurved physician who treats with medicine and words.

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कुछ रह गया है दिन भर आते फ़ोन कॉल्स में रोज रात को 9 बजे आने वाला कॉल रह गया है , घर जाने की रहती थी मुझे हमेशा उत्सुकता बिन पिता के सूना घर का आंगन रह गया है , गलती पर समझाना और हौंसला देना पागल है ,क्या तू कर लेगा ये सब सुनना रह गया है , जितना समय बिताया लगता था अभी तो वक़्त बहुत है वक़्त बचा हुआ है यार पापा आपके साथ बैठना रह गया है , सगे सम्बन्धी आपके होते हुए ही लगते थे अपने अब तो रिश्ता उनका हमसे बस नाम मात्र का रह गया , वो खिल खिलाकर हँसना गहरी बातें हल्के से कह जाना वो पलँग बिस्तर तो है दांतो का किटकिटा कर सोना रह गया है , पा लेंगे लाख मंज़िले कर ले फतेह भले ही सब कुछ यार पापा आपके गले लगकर शाबाशी लेना रह गया है । ©Dr.Govind Hersal

#कविता #MountainPeak #FathersDay #yaarpapa #pitaji  कुछ रह गया है 

दिन भर आते फ़ोन कॉल्स में 
रोज रात को 9 बजे आने वाला कॉल रह गया है ,
घर जाने की रहती थी मुझे हमेशा उत्सुकता 
बिन पिता के सूना घर का आंगन रह गया है ,
गलती पर समझाना और हौंसला देना 
पागल है ,क्या तू कर लेगा ये सब सुनना रह गया है ,
जितना समय बिताया लगता था अभी तो वक़्त बहुत है 
वक़्त बचा हुआ है यार पापा आपके साथ बैठना रह गया है ,
सगे सम्बन्धी आपके होते हुए ही लगते थे अपने 
अब तो रिश्ता उनका हमसे बस नाम मात्र का रह गया ,
वो खिल खिलाकर हँसना गहरी बातें हल्के से कह जाना 
वो पलँग बिस्तर तो है दांतो का किटकिटा कर सोना रह गया है ,
पा लेंगे लाख मंज़िले कर ले फतेह भले ही सब कुछ 
यार पापा आपके गले लगकर शाबाशी लेना रह गया है ।

©Dr.Govind Hersal

White ना कोई नई कहानी सुना रहा हूँ ना दुनिया को सबक नए दे रहा हूं वो जो मेरे अंदर मुझे नोंचे जा रहा है लिख कर उसी से पीछा छुड़ा रहा हूं । ©Dr.Govind Hersal

#कोट्स #rajdhani_night #kahaaniyan #Govind #Muses  White ना कोई नई कहानी सुना रहा हूँ 
ना दुनिया को सबक नए दे रहा हूं 
वो जो मेरे अंदर मुझे नोंचे जा रहा है 
लिख कर उसी से पीछा छुड़ा रहा हूं ।

©Dr.Govind Hersal

White फैसले फासलों के कर लिए बगावत फूलों ने जब भँवरों से कर ली । ©Dr.Govind Hersal

#कोट्स #flowers  White फैसले फासलों के कर लिए 
बगावत फूलों ने जब भँवरों से कर ली ।

©Dr.Govind Hersal

#flowers

13 Love

अधुरा अंधेरा अंधेरे कमरे में जैसे दीप जलाने को कोई तीली सुलगाता होगा ठीक वैसा ही लगता है जब कविता लिखने बैठता हूँ , जैसे जैसे कमरे में उजाला अंधरे को हटा रहा होता है वैसे ही लगता है जब शब्द कागज पर उतरने लगते हैं रोशनी व्याप्त होते ही कमरे में रखी वस्तुएं दिखने लगती ठीक वैसे ही कविता की पंक्तियाँ आकार लेने लगती है हवा से कई बार लौ कम होने लगती तो लगता कमरा हिल रहा हो तभी अनिगनत भाव विचार कवि के मन को हिलोर से भर देते हैं शब्दो में होड़ सी मच जाती है की मुझे कागज पर उतारा जाए कई बार कुछ शब्द नाराज़ हो जाते है और वो कविता किसी नोटपेड में अधुरी पड़ी रह जाती है । ©Dr.Govind Hersal

#कोट्स #candle  अधुरा अंधेरा 


अंधेरे कमरे में जैसे दीप जलाने को कोई तीली सुलगाता होगा 
ठीक वैसा ही लगता है जब कविता लिखने बैठता हूँ ,
जैसे जैसे कमरे में उजाला अंधरे को हटा रहा होता है 
वैसे ही लगता है जब शब्द कागज पर उतरने लगते हैं 
रोशनी व्याप्त होते ही कमरे में रखी वस्तुएं दिखने लगती 
ठीक वैसे ही कविता की पंक्तियाँ आकार लेने लगती है 
हवा से कई बार लौ कम होने लगती तो लगता कमरा हिल रहा हो 
तभी अनिगनत भाव विचार कवि के मन को हिलोर से भर देते हैं 
शब्दो में होड़ सी मच जाती है की मुझे कागज पर उतारा जाए 
कई बार कुछ शब्द नाराज़ हो जाते है और 
वो कविता किसी नोटपेड में अधुरी पड़ी रह जाती है ।

©Dr.Govind Hersal

#candle

14 Love

Village Life शहर रोजी रोटी तो दे देता है मगर जुबां का स्वाद छीन लेता है । शहर रहने को घर तो दे देता है मगर गांव का आंगन छीन लेता है । शहर लोगों से मुलाकात तो करा देता है मगर नही दे पाता गांव के लोगों सी आत्मीयता । शहर जुनून तो देता है खुद को बड़ा बनाने का मगर एवज में दे नही पाता है सुकून के लम्हात । शहर सीखा तो देता है मजबूती से लड़ना मगर दे नही पाता गांव से कोमलता । शहर लोगों को सपने तो दे देता है मगर छीन लेता है नीम के पेड़ तले की नींद । ©Dr.Govind Hersal

#कोट्स #villagelife #Jeevan #Sheher #seekh  Village Life शहर रोजी रोटी तो दे देता है 
मगर जुबां का स्वाद छीन लेता है ।

शहर रहने को घर तो दे देता है 
मगर गांव का आंगन छीन लेता है ।

शहर लोगों से मुलाकात तो करा देता है 
मगर नही दे पाता गांव के लोगों सी आत्मीयता ।

शहर जुनून तो देता है खुद को बड़ा बनाने का 
मगर एवज में दे नही पाता है सुकून के लम्हात ।

शहर सीखा तो देता है मजबूती से लड़ना 
मगर दे नही पाता गांव से कोमलता ।

शहर लोगों को सपने तो दे देता है 
मगर छीन लेता है नीम के पेड़ तले की नींद ।

©Dr.Govind Hersal

White मौके सबको देता हूँ मैं करीब रहने के मेरे देख के बेरुखी फिर खुद अलग कर देता हूँ । ©Dr.Govind Hersal

#कविता #sad_shayari  White मौके सबको देता हूँ मैं करीब रहने के मेरे
देख के बेरुखी फिर खुद अलग कर देता हूँ ।

©Dr.Govind Hersal

#sad_shayari

12 Love

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