Muskan Singhal

Muskan Singhal Lives in Bulandshahr, Uttar Pradesh, India

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इस रात ! सोची मैंने हमारी एक रात वो अधूरा साथ, टूटे ख्वाब, मंद मुस्कान और, ये बिखरे हालात । ©Muskan Singhal

#शायरी #fourlinepoetry #NightPath #gazal  इस रात !
सोची मैंने हमारी एक रात
वो अधूरा साथ, टूटे ख्वाब, मंद मुस्कान 
और,
ये बिखरे हालात ।

©Muskan Singhal

अगर चलना ना हो साथ, तो हाथ पकड़ना मत कुछ देर सोने के लिए, कांधे पर सर रखना मत मैं शरारती हूं, मनचली हूं, और नादान भी तो अपनी उलझी गलतफहमी, को इश्क़ कहना मत। ©Muskan Singhal

#शायरी #OneSeason #mohobbat #gltfemi #Nadaan  अगर चलना ना हो साथ, तो हाथ पकड़ना मत
कुछ देर सोने के लिए, कांधे पर सर रखना मत
मैं शरारती हूं, मनचली हूं, और नादान भी
तो अपनी उलझी गलतफहमी, को इश्क़ कहना मत।

©Muskan Singhal

जिन चीखों को आवाज़ में तब्दील करना मुश्किल हो उन्हें हंसकर टालना बेहतर है । ©Muskan Singhal

#अनुभव #innervoice #depression #Confusion #Preshani  जिन चीखों को आवाज़ में तब्दील करना मुश्किल हो
उन्हें हंसकर टालना बेहतर है ।

©Muskan Singhal

मैं कोई राहगीर नहीं एक आवारा हूं जो हर लम्हा खुल कर जीना चाहती हूं ना पछतावा बीती बातों का ना हो चिंता अगली सुबह की हर लम्हा बस खुद का बनाना चाहती हूं मैं कोई राहगीर नहीं एक आवारा हूं ©Muskan Singhal

#Inspiration #Freedom #Moment #Azadi #awara  मैं कोई राहगीर नहीं एक आवारा हूं
जो हर लम्हा खुल कर जीना चाहती हूं 
ना पछतावा बीती बातों का
ना हो चिंता अगली सुबह की
हर लम्हा बस खुद का बनाना चाहती हूं
मैं कोई राहगीर नहीं एक आवारा हूं

©Muskan Singhal

एक कहानी का अंत हो चुका है पर वो अंत मैं लिखना नहीं चाहती शायद कहीं कुछ बाकी है ज़हन में जिसे मैं अपना-ना नहीं चाहती। ©Muskan Singhal

#शायरी #alonesoul #Feeling #Change #ending  एक कहानी का अंत हो चुका है 
पर वो अंत मैं लिखना नहीं चाहती
शायद कहीं कुछ बाकी है ज़हन में
जिसे मैं अपना-ना नहीं चाहती।

©Muskan Singhal

भगत ने बहाया खून था नन्ही उम्र में ही चढ़ाया आज़ाद भारत का जुनून था छोड़ गिल्ली- डंडा वो हथियारों से खेला था उस बढ़ते जुनून का वो बालक अकेला था लोगों के मन में आज़ादी की भावना जगाई थी खुद की जिंदगी भूलाकर बुलंद आवाज़ उठाई थी। ©Muskan Singhal

#कविता #foreverindian #bhagatsingh #hindustan #Anubhav  भगत ने बहाया खून था
नन्ही उम्र में ही चढ़ाया आज़ाद भारत का जुनून था
छोड़ गिल्ली- डंडा वो हथियारों से खेला था
उस बढ़ते जुनून का वो बालक अकेला था
लोगों के मन में आज़ादी की भावना जगाई थी
खुद की जिंदगी भूलाकर बुलंद आवाज़ उठाई थी।

©Muskan Singhal
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