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#Bhakti

जगत जननी

153 View

#Bhakti

जगत जननी ♥️

3,186 View

#भौतिकवाद #मेरे_राम #जागृति #यथार्थ #प्रेम #जीवन  White राम हुई सकल माया में,
इस जग से प्रीत कहीं
न कबीर मरे, न रहीम मरे 
अंत मरे है हाड़-मास का शरीर॥
◆मेरे_राम◆

©Death_Lover
#श्रीहरिविष्णु #श्रीचरणों #श्रीहरि #महिमा #vishnubhagwan #nikita  Vishnu Bhagwan हे प्रभू तुम्हारे इन चरणों की महिमा न्यारी है 
ये मानव ही क्या,,,,,
श्री जगत जननी भी इन चरणों पर बलिहारी है।
अल्फ़ाज मेरे✍️🙏🙏

©Ashutosh Mishra

#vishnubhagwan हे प्रभू इन चरणों की महिमा न्यारी है ये मानव क्या,,,, श्री जगत जननी भी इन चरणों पर बलिहारी है। #श्रीचरणों #श्रीहरिविष्णु #

513 View

चित्र-चिंतन :- कुण्डलिया ताला मुँह पर मैं लगा , बैठा अब तक यार । सोचा था अनमोल है , प्रेम जगत व्यहवार ।। प्रेम जगत व्यहवार , इसी में जीवन फलता । लेकिन पग-पग आज , हमारा जीवन जलता ।। त्याग छोड़ व्यहवार , समय कहता है लाला । बुजदिल समझें लोग , देखकर मुँह पर ताला ।। १२/०४/२०२४     -    महेन्द्र सिंह प्रखर ©MAHENDRA SINGH PRAKHAR

#कविता  चित्र-चिंतन :- कुण्डलिया
ताला मुँह पर मैं लगा , बैठा अब तक यार ।
सोचा था अनमोल है , प्रेम जगत व्यहवार ।।
प्रेम जगत व्यहवार , इसी में जीवन फलता ।
लेकिन पग-पग आज , हमारा जीवन जलता ।।
त्याग छोड़ व्यहवार , समय कहता है लाला ।
बुजदिल समझें लोग , देखकर मुँह पर ताला ।।


१२/०४/२०२४     -    महेन्द्र सिंह प्रखर

©MAHENDRA SINGH PRAKHAR

चित्र-चिंतन :- कुण्डलिया ताला मुँह पर मैं लगा , बैठा अब तक यार । सोचा था अनमोल है , प्रेम जगत व्यहवार ।। प्रेम जगत व्यहवार , इसी में जीव

10 Love

#ब्रह्माण्ड #नवरात्रि #निर्माण #अंधकार #महामाई #भक्ति  

ब्रह्माण्ड में चारों तरफ़ सिर्फ अंधकार था व्याप्त।
चौथे रुप में माता ने तब किया अण्ड निर्माण।।

सभी जीवों और प्राणियों में है मां का तेज।
माता के कृपा बिना हो जाते हैं सब निस्तेज।।

सारा चराचर जगत है मां के ही माया से मोहित।
मां के ही प्रेरणा से होता है जगत में सबका हित।।

दिव्य प्रकाश जगत में मां कुष्मांडा फैलाती।
ममतामई, करुणामई, कल्याणकारी कहलाती।।

सौम्य स्वभाव वाली है मेरी मां अष्टभुजाओंवाली।
भक्तों की सारी विपदा दूर करती है महामाई।।

जो कोई श्रद्धा भक्ति से मां के शरण में आता।
सुख, समृद्धि,धन, सम्पदा बिन मांगे मिल जाता।।

©Shivkumar

#navratri #navratrispecial #नवरात्रि #navratri2024 #ब्रह्माण्ड में चारों तरफ़ सिर्फ #अंधकार था व्याप्त । चौथे रुप में माता ने तब किया

90 View

#Bhakti

जगत जननी

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#Bhakti

जगत जननी ♥️

3,186 View

#भौतिकवाद #मेरे_राम #जागृति #यथार्थ #प्रेम #जीवन  White राम हुई सकल माया में,
इस जग से प्रीत कहीं
न कबीर मरे, न रहीम मरे 
अंत मरे है हाड़-मास का शरीर॥
◆मेरे_राम◆

©Death_Lover
#श्रीहरिविष्णु #श्रीचरणों #श्रीहरि #महिमा #vishnubhagwan #nikita  Vishnu Bhagwan हे प्रभू तुम्हारे इन चरणों की महिमा न्यारी है 
ये मानव ही क्या,,,,,
श्री जगत जननी भी इन चरणों पर बलिहारी है।
अल्फ़ाज मेरे✍️🙏🙏

©Ashutosh Mishra

#vishnubhagwan हे प्रभू इन चरणों की महिमा न्यारी है ये मानव क्या,,,, श्री जगत जननी भी इन चरणों पर बलिहारी है। #श्रीचरणों #श्रीहरिविष्णु #

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चित्र-चिंतन :- कुण्डलिया ताला मुँह पर मैं लगा , बैठा अब तक यार । सोचा था अनमोल है , प्रेम जगत व्यहवार ।। प्रेम जगत व्यहवार , इसी में जीवन फलता । लेकिन पग-पग आज , हमारा जीवन जलता ।। त्याग छोड़ व्यहवार , समय कहता है लाला । बुजदिल समझें लोग , देखकर मुँह पर ताला ।। १२/०४/२०२४     -    महेन्द्र सिंह प्रखर ©MAHENDRA SINGH PRAKHAR

#कविता  चित्र-चिंतन :- कुण्डलिया
ताला मुँह पर मैं लगा , बैठा अब तक यार ।
सोचा था अनमोल है , प्रेम जगत व्यहवार ।।
प्रेम जगत व्यहवार , इसी में जीवन फलता ।
लेकिन पग-पग आज , हमारा जीवन जलता ।।
त्याग छोड़ व्यहवार , समय कहता है लाला ।
बुजदिल समझें लोग , देखकर मुँह पर ताला ।।


१२/०४/२०२४     -    महेन्द्र सिंह प्रखर

©MAHENDRA SINGH PRAKHAR

चित्र-चिंतन :- कुण्डलिया ताला मुँह पर मैं लगा , बैठा अब तक यार । सोचा था अनमोल है , प्रेम जगत व्यहवार ।। प्रेम जगत व्यहवार , इसी में जीव

10 Love

#ब्रह्माण्ड #नवरात्रि #निर्माण #अंधकार #महामाई #भक्ति  

ब्रह्माण्ड में चारों तरफ़ सिर्फ अंधकार था व्याप्त।
चौथे रुप में माता ने तब किया अण्ड निर्माण।।

सभी जीवों और प्राणियों में है मां का तेज।
माता के कृपा बिना हो जाते हैं सब निस्तेज।।

सारा चराचर जगत है मां के ही माया से मोहित।
मां के ही प्रेरणा से होता है जगत में सबका हित।।

दिव्य प्रकाश जगत में मां कुष्मांडा फैलाती।
ममतामई, करुणामई, कल्याणकारी कहलाती।।

सौम्य स्वभाव वाली है मेरी मां अष्टभुजाओंवाली।
भक्तों की सारी विपदा दूर करती है महामाई।।

जो कोई श्रद्धा भक्ति से मां के शरण में आता।
सुख, समृद्धि,धन, सम्पदा बिन मांगे मिल जाता।।

©Shivkumar

#navratri #navratrispecial #नवरात्रि #navratri2024 #ब्रह्माण्ड में चारों तरफ़ सिर्फ #अंधकार था व्याप्त । चौथे रुप में माता ने तब किया

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