Bhavesh Thakur

Bhavesh Thakur

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खलल पड़ गई तब लज्जत-ए-हयात में, उस-सा हसीन जब देखा इस कायनात में.. ये प्यास बुझेगी अब आब - ए - हयात से, उसका चेहरा हटता ही नहीं दिलों-दिमाग से.. सब अंधेरा लग रहा नूर - ए - हयात में, मुझे फिक़्र होती हैं तेरे बेरुख अंदाज़ से.. कभी भी जुदा न करना शरीक-ए- हयात से, ऐ खुदा दुआ हैं मेरी तुमसे हर बार ये.. तूझे बस पाने की आरज़ू इस दौर-ए-हयात में, मैं खुद को ही भूले जा रहा हूँ तेरे याद में.. पहली जगह मिले तूझे मेरे रूदाद-ए-हयात में, माँगुंगा तेरी खुशी अपनी आखरी मुराद में.. ©Bhavesh Thakur Rudra

#शायरी #rain  खलल पड़  गई  तब  लज्जत-ए-हयात  में,
उस-सा हसीन जब देखा इस  कायनात  में..

ये  प्यास  बुझेगी  अब  आब - ए - हयात  से,
उसका चेहरा हटता ही नहीं दिलों-दिमाग से..

सब   अंधेरा  लग   रहा   नूर - ए - हयात  में,
मुझे   फिक़्र   होती   हैं  तेरे बेरुख अंदाज़ से..

कभी भी जुदा न करना शरीक-ए- हयात से,
ऐ  खुदा  दुआ  हैं  मेरी   तुमसे  हर   बार  ये..

तूझे बस पाने की आरज़ू इस दौर-ए-हयात में,
मैं  खुद  को ही भूले  जा  रहा  हूँ  तेरे  याद में..

पहली जगह मिले तूझे मेरे रूदाद-ए-हयात में,
माँगुंगा  तेरी  खुशी  अपनी  आखरी  मुराद में..

©Bhavesh Thakur Rudra

#Poetry #rain

17 Love

खुद में गुण दिखते है,औरों को दोष देना आसान, लोग यहाँ पर मृत हैं, किन्तु जीवित हैं पासान.. उचित अनुचित का भेद नहीं, स्थिल पड़ा समाज, न्याय हेतू लड़ने वालों की, ठंडी पड़ी आवाज.. ऊँच-नीच की सीमा बड़ी हैं कोई नहीं समान, मरते हैं लोग जात-पात पर, नगर बना शमशान.. भगवान सभी के एक, मनुष्य में कौन निकले भेद, सबको समान अधिकार दो वर्ना,अन्त में होगा खेद.. निर्णय लेने से डरते कायर, वीर को कैसा भय, जो समाजिक कुरीतियों से लड़ें,निडर,अजय,अभय.. एक ही छत्र के नीचे बैठे, सबको मिले समान छाया, सम्यक सहयोग हो सबका, बने समाज की सुदृढ काया.. ©Bhavesh Thakur Rudra

#समाज  खुद में गुण दिखते है,औरों को दोष देना आसान,
लोग यहाँ  पर  मृत हैं, किन्तु  जीवित  हैं  पासान..

उचित अनुचित का भेद नहीं, स्थिल पड़ा समाज,
न्याय  हेतू  लड़ने  वालों  की, ठंडी पड़ी  आवाज..

ऊँच-नीच की  सीमा  बड़ी  हैं  कोई  नहीं  समान,
मरते हैं लोग जात-पात  पर, नगर बना  शमशान..

भगवान  सभी के एक, मनुष्य में कौन निकले भेद,
सबको समान अधिकार दो वर्ना,अन्त में होगा खेद..

निर्णय  लेने  से  डरते  कायर,  वीर  को  कैसा  भय,
जो समाजिक कुरीतियों से लड़ें,निडर,अजय,अभय..

एक ही  छत्र  के नीचे  बैठे, सबको  मिले  समान छाया,
सम्यक सहयोग हो सबका, बने समाज की सुदृढ काया..

©Bhavesh Thakur Rudra

#Society

17 Love

सुर्य आग बरसाता हैं, क्रोधित बैठा अब्ज़, अन्त ग्लानि करते मानव, धरा रहीं ना सब्ज़.. बासी पेट बच्चे सोते, करते क्रंदन पुकार, कष्ट से व्याकुल होता हृदय, कोन सुने झंकार.. पृथ्वी बचाने आएँ, यहाँ नहीं कोई अवतार, खुद की दुर्गति देख हँसे, ज्ञानी व समझदार.. शिथिल पड़ जाती काया, कभी कंपन करता देह, भय हैं कहीं खो ना जायें, जिनसे हमें हैं स्नेह.. भूमी बंज़र हो गई, काल बन गया धूप, हरियाली नष्ट कर गया, राक्षस सा स्वरूप.. ©Bhavesh Thakur Rudra

#कविता #endoftheworld  सुर्य आग  बरसाता  हैं, क्रोधित  बैठा अब्ज़,
अन्त ग्लानि करते मानव, धरा रहीं ना सब्ज़..

बासी  पेट  बच्चे  सोते,  करते  क्रंदन  पुकार, 
कष्ट से व्याकुल होता हृदय, कोन सुने झंकार..

पृथ्वी  बचाने  आएँ, यहाँ  नहीं  कोई अवतार,
खुद  की दुर्गति  देख  हँसे, ज्ञानी व समझदार..

शिथिल पड़ जाती काया, कभी कंपन करता देह,
भय  हैं  कहीं खो  ना  जायें, जिनसे  हमें  हैं स्नेह..

भूमी  बंज़र  हो  गई,  काल  बन  गया  धूप,
हरियाली नष्ट  कर  गया, राक्षस सा स्वरूप..

©Bhavesh Thakur Rudra

. . #endoftheworld

13 Love

मैं जानता हूँ  तुम चले तो गये हो दूर बहुत, पर मुड़कर ज़रुर देखा होगा मैं जानता हूँ.. तन्हाई मुझे खोखला कर रही अंदर से, तुझे फ़िक्र है मेरी मैं जानता हूँ.. ये मोहब्बत इतना महंगा पड़ेगा सोचा ना था, मेरा हाल-ए-दिल या तो तुम या मैं जानता हूँ.. मशहूरी के गुरुर में मेरे इश्क़ को ठुकरा रही हो, तुझे शोहरत का गुमान है मैं जानता हूँ.. तेरा आलिंगन कर तुममे एकाकार हो जाने की आश है, तुझे खोने का ये दर्द बस मैं जानता हूँ.. दिलों-दिमाग में तुम्हें खोने का खौफ़ छाया है, एक दिन तेरे इश्क़ में मर जाऊँगा मैं जानता हूँ.. ©Bhavesh Thakur Rudra

#शायरी #iknow  मैं जानता हूँ 

तुम    चले    तो    गये    हो    दूर    बहुत,
पर  मुड़कर  ज़रुर देखा होगा  मैं जानता हूँ..

तन्हाई  मुझे  खोखला कर रही अंदर से,
तुझे   फ़िक्र   है  मेरी   मैं  जानता   हूँ..

ये मोहब्बत  इतना महंगा पड़ेगा सोचा ना था,
मेरा हाल-ए-दिल या तो तुम या मैं जानता हूँ..

मशहूरी के गुरुर में मेरे इश्क़ को ठुकरा रही हो,
तुझे   शोहरत   का   गुमान  है  मैं  जानता  हूँ..

तेरा  आलिंगन कर तुममे एकाकार हो जाने की आश है,
तुझे    खोने    का    ये   दर्द    बस    मैं    जानता   हूँ..

दिलों-दिमाग  में  तुम्हें खोने का खौफ़ छाया है,
एक दिन तेरे इश्क़ में मर जाऊँगा  मैं जानता हूँ..

©Bhavesh Thakur Rudra

. . #iknow

15 Love

मेरी यात्रा  निर्भीकता से पुर्ण होकर  दुर्गम पथ पर चल पड़ा, पराजय स्वीकार किया कभी ना आगे बस बढता रहा.. जीवन यात्रा आरम्भ हुई तो बाधाएं थी समक्ष खड़ी, परिश्रम का हाथ थामा तब मैं कष्ट, पीड़ा क्षणभंगुर थी.. मेरी यात्रा चलती रहेगी  जब तक तन में प्राण है, सुखद अनुभूति होती हैं अब लगता यहीं सम्मान है.. ©Bhavesh Thakur Rudra

#शायरी #Travelstories  मेरी यात्रा 

निर्भीकता     से     पुर्ण    होकर 
दुर्गम    पथ    पर    चल    पड़ा,
पराजय स्वीकार किया कभी ना
आगे      बस      बढता      रहा..

जीवन  यात्रा  आरम्भ  हुई  तो
बाधाएं    थी    समक्ष     खड़ी,
परिश्रम  का हाथ  थामा तब मैं
कष्ट,   पीड़ा     क्षणभंगुर    थी..

मेरी   यात्रा    चलती     रहेगी 
जब   तक   तन   में   प्राण  है,
सुखद  अनुभूति  होती हैं  अब
लगता     यहीं     सम्मान     है..

©Bhavesh Thakur Rudra

मेरी यात्रा  निर्भीकता से पुर्ण होकर  दुर्गम पथ पर चल पड़ा, पराजय स्वीकार किया कभी ना आगे बस बढता रहा। जीवन यात्रा आरम्भ होते ही

15 Love

पहली दृष्टि में प्रेम हुआ तुमसे, मैं हार बैठा अपना तन-मन.. तुमसे ही दिन शुरु होती थी, रात होती तुमपे ही खतम.. विश्वास की अपेक्षा थी तुमसे, तोड़ दिये मेरे सारे स्वप्न.. प्राण जाने का भय नहीं मुझको, तुम्हें खोने से लगता था डर.. भयानक स्वप्न मेरा सत्य हो गया, मेरा ध्यान नहीं आया एक क्षण.. वचन था साथ निभाने का मेरा, सब नष्ट हो गया तुम्हारे कारण.. प्रेम की परिभाषा कैसी हैं, अब देखो मेरे नेत्र हैं नम.. हृदय की पीड़ा हृदय ही जानें, विरह से विचलित हुआ ये मन.. व्यथा क्या कहूँ अन्तर्मन की सखी, जी रहा हूँ तुम बिन ये नीरस जीवन.. ©Bhavesh Thakur Rudra

#कविता #alonesoul  पहली  दृष्टि में प्रेम हुआ तुमसे,
मैं  हार  बैठा  अपना   तन-मन..

तुमसे ही दिन शुरु होती थी,
रात  होती  तुमपे  ही खतम..

विश्वास की अपेक्षा थी तुमसे,
तोड़   दिये   मेरे   सारे  स्वप्न..

प्राण जाने का भय नहीं मुझको,
तुम्हें  खोने  से   लगता  था  डर..

भयानक स्वप्न मेरा सत्य हो गया,
मेरा ध्यान नहीं  आया एक क्षण..

वचन था साथ निभाने का मेरा,
सब नष्ट हो गया तुम्हारे कारण..

प्रेम की  परिभाषा  कैसी  हैं,
अब  देखो  मेरे  नेत्र  हैं  नम..

हृदय  की पीड़ा हृदय ही जानें,
विरह से विचलित हुआ ये मन..

व्यथा  क्या कहूँ अन्तर्मन की सखी,
जी रहा हूँ तुम बिन ये नीरस जीवन..

©Bhavesh Thakur Rudra

. . पहली दृष्टि में प्रेम हुआ तुमसे,

17 Love

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