Khuman Singh

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🚩 🚩🙏🙏जय जय श्री राम 🙏🙏🚩 🚩 🖋🖊🖋नये जमाने की नई कलम 🖋🖊 मन के विचार ,भाव ओर आज की दुनिया की घटना ओर परिस्थिति को शब्दों का रूप देना मेरा ध्येय

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ये वक्त गुजर जायेगा ये वक्त गुजर जायेगा तेरी इस नादानी में कुछ कर गुजर जाएगा गर सम्भल गया जवानी में झोंककर खुद को गया याद रहेगी रवानी में कंधा भारी सा लगेगा पिछड़ गया बेपरवाही में आज सम्भलना संभव है बित गया सो पानी में हवा बाजियां खुब की फिसल गया मेहरबानी में हाथ थमा था पापा का अब जिम्मेदारी आनी है समाज का बन बेठ तू अभी सबकी बानी में हारना ना सीख तूं जीत तेरी जुबानी है सूर्य सा तूं तेज बन आग निकाली जानी है तप कर तूं ओज बन योद्धा बन बलवानी है हंसकर तूं बोला कर यही आमवाणी है साथ चलकर साथ निभा खुद की डगर बनानी है मखमल सा तूं कोमल बन पत्थर दिल बात पुरानी है देख तेरी कदर को अब कमबख़्त में तेरी निशानी है ये वक्त गुजर जायेगा तेरी इस नादानी में ©Khuman Singh

#time_is_most_important #कविता #Hope  ये वक्त गुजर जायेगा 


ये वक्त गुजर जायेगा
तेरी इस नादानी में
कुछ कर गुजर जाएगा
गर सम्भल गया जवानी में 
झोंककर खुद को गया
याद रहेगी रवानी में
कंधा भारी सा लगेगा
पिछड़ गया बेपरवाही में
आज सम्भलना संभव है 
बित गया सो पानी में
हवा बाजियां खुब की
फिसल गया मेहरबानी में
हाथ थमा था पापा का
अब जिम्मेदारी आनी है
समाज का बन बेठ तू
अभी सबकी बानी में
हारना ना सीख तूं
जीत तेरी जुबानी है
सूर्य सा तूं तेज बन
आग निकाली जानी है 
तप कर तूं ओज बन
योद्धा बन बलवानी है 
हंसकर तूं बोला कर
यही आमवाणी है
साथ चलकर साथ निभा
खुद की डगर बनानी है
मखमल सा तूं कोमल बन
पत्थर दिल बात पुरानी है
देख तेरी कदर को अब
कमबख़्त में तेरी निशानी है 
ये वक्त गुजर जायेगा
तेरी इस नादानी में

©Khuman Singh

कियां करूं म्हैं थांरा रूप बखाण ओ जीव घणों मुळकै बात करूं थांरे होठां री ओ आंख घणी झुरके चोड़ो ललाड़ चूंखा ज्यूं मिनख बाताळू मान रंग शया पर सांवळो बाळ बिलोवण डोर रदो म्हांरो कळकळै कळी नी जांणे कोळ ©Khuman Singh

#विचार #beauti  कियां करूं म्हैं थांरा 
रूप बखाण
ओ जीव घणों मुळकै
बात करूं थांरे होठां री
ओ आंख घणी झुरके
चोड़ो ललाड़ चूंखा ज्यूं
मिनख बाताळू मान
रंग शया पर सांवळो
बाळ बिलोवण डोर
रदो म्हांरो कळकळै
कळी नी जांणे कोळ

©Khuman Singh

सौंदर्य , रूप बखाण #beauti

12 Love

इश्क घनघोर घटा है प्रेम छटा है , नीर वादियों में इश्क बढा है। बिजली चमकी है बादल फटा है, रंगदारीयो में प्यार बंटा है। फूल बरसे है माला बनी है, इस बगिया में चाहत बनी है। मैं हसा हूं दिल बसा है, सोनाक्षी से मिल बसा है। नींद खुली है साथ मिला है, हाथ में तेरा हाथ मिला है। मुस्कराहट पर लफ्ज़ शिले है, नब्ज से तेरा रग मिला है। खुशमिजाज मन मिला है, तन से तेरा तन मिला है। घनघोर घटा है प्रेम छटा है, नीर वादियों में इश्क बढा है। उग्र है ये आंसू मेरे , इश्क जंग में वतन मिला है। सफर बढा है राह मिली है , तुमसे मिलकर चाह गढी है। सफर में हमसफ़र मिले हैं , तुमसा नहीं तुम ही मिले हैं। होश में उफ आह मैं , मोज है की तुम सरा मैं। लाख मिलेंगे जहां मैं , तुमसा मिले कहां हमें। रुखसत की परवाह हमें , फुरसत की राह में। ताल में लय में, अंखिया लड़े स्याह मैं। घनघोर घटा है प्रेम छटा है , नीर वादियों में इश्क बढा है। ©Khuman Singh

#कविता #Isq  इश्क

घनघोर घटा है प्रेम छटा है ,
नीर वादियों में इश्क बढा है।
बिजली चमकी है बादल फटा है,
रंगदारीयो में प्यार बंटा है।
फूल बरसे है माला बनी है,
इस बगिया में चाहत बनी है।
मैं हसा हूं दिल बसा है,
सोनाक्षी से मिल बसा है।
नींद खुली है साथ मिला है,
हाथ में तेरा हाथ मिला है।
मुस्कराहट पर लफ्ज़ शिले है,
नब्ज से तेरा रग मिला है।
खुशमिजाज मन मिला है,
तन से तेरा तन मिला है।
घनघोर घटा है प्रेम छटा है,
नीर वादियों में इश्क बढा है।
उग्र है ये आंसू मेरे ,
इश्क जंग में वतन मिला है।
सफर बढा है राह मिली है ,
तुमसे मिलकर चाह गढी है।
सफर में हमसफ़र मिले हैं ,
तुमसा नहीं तुम ही मिले हैं।
होश में उफ आह मैं ,
मोज है की तुम सरा मैं।
लाख मिलेंगे जहां मैं ,
तुमसा मिले कहां हमें।
रुखसत की परवाह हमें ,
फुरसत की राह में।
ताल में लय में, 
अंखिया लड़े स्याह मैं।
घनघोर घटा है प्रेम छटा है ,
नीर वादियों में इश्क बढा है।

©Khuman Singh

isq #Isq

17 Love

#विचार #SadStorytelling  सम्भल जा इस युग की नारी

प्रथम पैर धर विद्या मंदिर में गुरू से आशीर्वाद लिया शिक्षा जगत की जननी जाणी पहले कच्चे अक्षर से मन मुटाव था विद्यालय से गुरू ने किया आने को प्रेरित कभी रोया कभी सोया शिक्षक ने हमें तन मैं समोया भले बुरे का भेद ना था बस कही डोर पर हम चले अजाणी ©Khuman Singh

#विचार #Teachersday  प्रथम पैर धर विद्या मंदिर में
गुरू से आशीर्वाद लिया
शिक्षा जगत की जननी जाणी
पहले कच्चे अक्षर से
मन मुटाव था विद्यालय से
गुरू ने किया आने को प्रेरित
कभी रोया कभी सोया
शिक्षक ने हमें तन मैं समोया
भले बुरे का भेद ना था
बस कही डोर पर हम चले अजाणी

©Khuman Singh

#Teachersday

15 Love

हिन्दी ( भाषा) मुख से निकली बाणी है , कण कण की ज्वाला राणी है वो आर्यावर्त की वाणी है , हिन्द की शौर्य जुबानी है वो ना धर्म अधर्म की मणी है , सद्भावना की ठकुराणी है वो गाथा की मुजबाणी है , हर हिन्दुस्तानी की रवानी है वो मुख से निकली बाणी है , कण कण की ज्वाला राणी है वो इश्क के लफ़्ज़ों में है , प्रित की परवाणी है वो कटे फलक की राड़धरा है, बिन्दु बिन विधवा नारी है वो 28 बन्धुओं की मिलनसार है, राष्ट्र की भाषा हिन्दी है वो मुख से निकली बाणी है , कण कण की ज्वाला राणी है वो उत्तर निराधार से जाने, दक्षिण बड़ा रिझालू है वो पश्चिम प्रेम से बोले हिन्दी, पूर्व में हिन्दी चीनी भाई है वो संस्कृति का आधार है , हम बिन यह निराधार है वो हर कवि की निगहबानी, बन बैठी जुबां की राणी वो मुख से निकली बाणी है , कण कण की ज्वाला राणी है वो गान मैं अहसान मैं, है हमारी रग रग की धार में वो अलंकार जिसका श्रंगार है, संज्ञा जिसका वस्त्र है वो व्याकरण व्यवहार जिसका,ढाल जिसकी संधि है वो मुख से निकली बाणी है , कण कण की ज्वाला राणी है वो अंग्रेजी का तोड़ है, हिन्दी सबका निचोड़ है वो लिखते कलम से कहती हैं, कलमकार की कलम है वो लिखते लिखते कलम घिसती, जिसकी टीस नहीं मिटती है वो जिसके नाम से देश बना, इतनी प्रिय मधुवाणी है वो मुख से निकली बाणी है , कण कण की ज्वाला राणी है वो ©Khuman Singh

#कविता #hindidivas  हिन्दी ( भाषा)

मुख से निकली बाणी है , कण कण की ज्वाला राणी है वो
आर्यावर्त की वाणी है  , हिन्द की शौर्य जुबानी है वो
ना धर्म अधर्म की मणी है , सद्भावना की ठकुराणी है वो
गाथा की मुजबाणी है , हर हिन्दुस्तानी की रवानी है वो
मुख से निकली बाणी है , कण कण की ज्वाला राणी है वो
इश्क के लफ़्ज़ों में है , प्रित की परवाणी है वो
कटे फलक की राड़धरा है, बिन्दु बिन विधवा नारी है वो
28 बन्धुओं की मिलनसार है, राष्ट्र की भाषा हिन्दी है वो
मुख से निकली बाणी है , कण कण की ज्वाला राणी है वो
उत्तर निराधार से जाने, दक्षिण बड़ा रिझालू है वो
पश्चिम प्रेम से बोले हिन्दी, पूर्व में हिन्दी चीनी भाई है वो
संस्कृति का आधार है , हम बिन यह निराधार है वो
हर कवि की निगहबानी, बन बैठी जुबां की राणी वो 
मुख से निकली बाणी है , कण कण की ज्वाला राणी है वो
गान मैं अहसान मैं, है हमारी रग रग की धार में वो
अलंकार जिसका श्रंगार है, संज्ञा जिसका वस्त्र है वो
व्याकरण व्यवहार जिसका,ढाल जिसकी संधि है वो
मुख से निकली बाणी है , कण कण की ज्वाला राणी है वो
अंग्रेजी का तोड़ है, हिन्दी सबका निचोड़ है वो 
लिखते कलम से कहती हैं, कलमकार की कलम है वो 
लिखते लिखते कलम घिसती, जिसकी टीस नहीं मिटती है वो
जिसके नाम से देश बना, इतनी प्रिय मधुवाणी है वो
मुख से निकली बाणी है , कण कण की ज्वाला राणी है वो

©Khuman Singh

#hindidivas

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