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तुम्हारे इंतजार में बैठे रहे। सावन की ये रिमझिम झड़ियां अनवरत बरसती रहीं, ये आंखें तुम्हें देखने के लिए न जाने कब तक तरसती रहीं । न तुम आए, और न तुम्हारे आने की आस रही, तुम जान नहीं सकते कि ये तन्हाइयां हमें किस क़दर खटकती रहीं। हम पहाड़ी पर उतरे हुए उन बादलों को देखे रहे, और साथ–साथ तुम्हारे इंतजार में बैठे रहे। झरने की भांति आंखों से झर–झर पानी झरता रहा, मिलन का एक ख़्वाब भी मन ही मन में तिरता रहा। हम झमाझम बारिश में खेत की मेढ़ में बैठे भीगते रहे, न जाने क्यों इन मोतियों सी बूंदों को देखकर भी भीतर से कुछ–कुछ खीझते रहे।। तुम्हारे आने की आस न होने पर भी हम क्रोध में वहीं पर ऐंठे रहे, बदन ठंड से कुढ़ने लगा फिर भी हम यूं ही बैठे रहे। न तुम आए और न तुम्हारे आने की आस रही, कुछ न रहा हमारे पास, बस तन्हाइयां ही साथ रहीं। कैसे बताएं कि हम उस हाल में कैसे रहे, ख़ुद को अपनी ही बाहों में पकड़े बैठे रहे। हम उस पार पहाड़ी से गिरते सफ़ेद झरने को देखे रहे, और साथ–साथ तुम्हारे इंतजार में बैठे रहे।। नदियों का कोलाहल न जाने क्यों शोर मचाता रहा, मेघों की गर्जन सुनते ही ये मन भी तुमसे मिलने के लिए जोर लगाता रहा। बैठे–बैठे इंतजार के सिवा और क्या हमारे हाथ में था? बारिश, एकांत, नदियों का कोलाहल, मेघों का गर्जन,सब हमारे साथ में था, बस एक तू ही था जो हमारे पास में न था। न जाने क्यों हम एकांत में भी वहीं पर ऐंठे रहे, हम पहाड़ी पर से बादलों को ऊपर उड़ते देखे रहे, और साथ साथ तुम्हारे इंतजार में बैठे रहे।। ©Deepa Ruwali

#कविता #thought #writing #writer #kavita  तुम्हारे इंतजार में बैठे रहे।

सावन की ये रिमझिम झड़ियां अनवरत बरसती रहीं,
ये आंखें तुम्हें देखने के लिए न जाने कब तक तरसती रहीं ।
न तुम आए, और न तुम्हारे आने की आस रही,
तुम जान नहीं सकते कि ये तन्हाइयां हमें किस क़दर खटकती रहीं।
  हम पहाड़ी पर उतरे हुए उन बादलों को देखे रहे,
  और साथ–साथ तुम्हारे इंतजार में बैठे रहे।

  
झरने की भांति आंखों से झर–झर पानी झरता रहा,
मिलन का एक ख़्वाब भी मन ही मन में तिरता रहा।
   हम झमाझम बारिश में खेत की मेढ़ में बैठे भीगते रहे,
न जाने क्यों इन मोतियों सी बूंदों को देखकर भी भीतर से कुछ–कुछ खीझते रहे।।
     तुम्हारे आने की आस न होने पर भी हम क्रोध में वहीं पर ऐंठे रहे,
 बदन ठंड से कुढ़ने लगा फिर भी हम यूं ही बैठे रहे।
  न तुम आए और न तुम्हारे आने की आस रही,
  कुछ न रहा हमारे पास, बस तन्हाइयां ही साथ रहीं।
     कैसे बताएं कि हम उस हाल में कैसे रहे,
  ख़ुद को अपनी ही बाहों में पकड़े बैठे रहे।
  हम उस पार पहाड़ी से गिरते सफ़ेद झरने को देखे रहे,
  और साथ–साथ तुम्हारे इंतजार में बैठे रहे।।


नदियों का कोलाहल न जाने क्यों शोर मचाता रहा,
  मेघों की गर्जन सुनते ही ये मन भी तुमसे मिलने के लिए जोर लगाता रहा।
  बैठे–बैठे इंतजार के सिवा और क्या हमारे हाथ में था?
  बारिश, एकांत, नदियों का कोलाहल, मेघों का गर्जन,सब हमारे साथ में था,
       बस एक तू ही था जो हमारे पास में न था।
 न जाने क्यों हम एकांत में भी वहीं पर ऐंठे रहे,
हम पहाड़ी पर से बादलों को ऊपर उड़ते देखे रहे,
और साथ साथ तुम्हारे इंतजार में बैठे रहे।।

©Deepa Ruwali

हमें अंत तक लड़ना होगा जीवन एक महासंग्राम है, हर हाल में इससे लड़ने का साहस करना होगा। हार का डर भीतर हरगिज़ न रहे, हमें अंत तक लड़ना होगा, ये अगर गमों का सागर बन सामने आए, तो हर हाल में इसे तरना होगा, भीरूता से परे होकर वीरता से कार्य करना होगा बुज़दिलों की भांति हारकर मरना कदापि उचित नहीं, हमें अंत तक लड़ना होगा।। न कोई संगी और न कोई साथी होगा, बस संग अपने साहस रहे, इतना ही काफ़ी होगा। हम लड़ने के लिए समर्थ हैं, हर क़दम पर हमारी इसी दृढ़ विश्वास की नींव को हिलाया जायेगा, इस सफ़र में आगे बढ़ते–बढ़ते हर दफा हमें खौफ़ का ज़हर भी पिलाया जायेगा। बावजूद इसके भी हमें कदापि न मरना होगा, हम बुज़दिल नहीं हैं, हमें अंत तक लड़ना होगा।। जीवन का ये सफ़र कई बार मन को भाएगा नहीं, भीतर से पराजित होने का डर भी जायेगा नहीं। किसी भी हाल में हमें पीछे नहीं मुड़ना होगा पूरी सामर्थ्य के साथ इस रास्ते पर आगे बढ़ना होगा। अन्यथा हम जीवन को व्यर्थ में चर रहे होंगे, जिंदा होकर भी पल-पल मर रहे होंगे। ऐसा न हमें करना होगा, हम बुज़दिल नहीं हैं, हमें अंत तक लड़ना होगा।। ©Deepa Ruwali

#कविता #traintrack #thought #writing #writer  हमें अंत तक लड़ना होगा 

  जीवन एक महासंग्राम है, 
      हर हाल में इससे लड़ने का साहस करना होगा।
 हार का डर भीतर हरगिज़ न रहे,
              हमें अंत तक लड़ना होगा,
ये अगर गमों का सागर बन सामने आए,
     तो हर हाल में इसे तरना होगा,
भीरूता से परे होकर वीरता से कार्य करना होगा
       बुज़दिलों की भांति हारकर मरना कदापि उचित नहीं,
हमें अंत तक लड़ना होगा।।

  न कोई संगी और न कोई साथी होगा,
  बस संग अपने साहस रहे, इतना ही काफ़ी होगा।
    हम लड़ने के लिए समर्थ हैं,
     हर क़दम पर हमारी इसी दृढ़ विश्वास की नींव को हिलाया जायेगा,
     इस सफ़र में आगे बढ़ते–बढ़ते हर दफा हमें खौफ़ का ज़हर भी पिलाया जायेगा।
     बावजूद इसके भी हमें कदापि न मरना होगा,
 हम बुज़दिल नहीं हैं,
 हमें अंत तक लड़ना होगा।।

   जीवन का ये सफ़र कई बार  मन को भाएगा नहीं,
         भीतर से पराजित होने का डर भी जायेगा नहीं।
किसी भी हाल में हमें पीछे नहीं मुड़ना होगा
        पूरी सामर्थ्य के साथ इस रास्ते पर आगे बढ़ना होगा।
अन्यथा हम जीवन को व्यर्थ में चर रहे होंगे,
   जिंदा होकर भी पल-पल मर रहे होंगे।
   ऐसा न हमें करना होगा, 
   हम  बुज़दिल नहीं हैं,
   हमें अंत तक लड़ना होगा।।

©Deepa Ruwali

दूर होकर भी करीब पाया तुम्हें ,, अब अपना नसीब बनाया तुम्हें,, गुस्सा होकर तुझसे, तुझसे ही बात करने को बेताब रहता है ये दिल ,, शायद तेरे हर लहजे में जादू है कोई,, जो दिल ने सबसे हसीन बताया तुम्हें ,, हाय, ये कातिल आंखें और चेहरा मासूम, शायद ,कुदरत ने फुरसत से बनाया तुम्हें दिल और धड़कन में रहेते हो तुम ,, एक पल भी नहीं भुलाया तुम्हें ,, मेरा खिलना-मुरझाना है तेरे हाथों में,, लो अपना दामन फैलाया तुम्हें ,, मेरे इन आंखों में तुम पढ़ लेना ,,, जो अब तक कह ना पाई तुम्हें ...... दूर होकर भी करीब पाया तुम्हे ,, अब अपना नसीब बनाया तुम्हे ...... ©Pragya Karn

#nojoto❤ #poetry❤ #tereliye #writing #love❤  दूर होकर भी करीब पाया तुम्हें ,,
अब अपना नसीब बनाया तुम्हें,, 

गुस्सा होकर तुझसे, 
तुझसे ही बात करने को बेताब रहता है ये दिल ,, 

  शायद तेरे हर लहजे में जादू है कोई,,
जो दिल ने सबसे हसीन बताया तुम्हें ,,

हाय, ये कातिल आंखें और चेहरा मासूम,
शायद ,कुदरत ने फुरसत से बनाया तुम्हें

दिल और धड़कन में रहेते हो तुम ,,
एक पल भी नहीं भुलाया तुम्हें ,,

मेरा खिलना-मुरझाना है तेरे हाथों में,,
 लो अपना दामन फैलाया तुम्हें ,,

मेरे इन आंखों में तुम पढ़ लेना ,,,
 जो अब तक कह ना पाई तुम्हें ......

दूर होकर भी करीब पाया तुम्हे ,,
अब अपना नसीब बनाया तुम्हे ......

©Pragya Karn

White एक घर में बचपन बीता ,दूसरे में जीवन बिताना पड़ता है , मां ,भाई ,बहन ,पापा का प्यार जाने कब दायरे में सिमट जाता है , उस घर आंगन भी जाने को सबसे इजाज़त लेना पड़ता है ,, एक हाथ से कई रिश्ते छूटे, दूजा हाथ कई रिश्तों के लिए बढ़ाना पड़ता है ,, कभी मन से कभी बेमन सारे रिश्ते निभाने पड़ते है , किसी एक शख्स के खातिर पूरी जिंदगी बदलनी पड़ती है , एक घर में बचपन बीता ,दूसरे में जीवन बिताना पड़ता है ..... एक घर में बचपन बीता,दूसरे में जीवन बिताना पड़ता है ...... ©Pragya Karn

#writing #poem  White एक घर में बचपन बीता ,दूसरे में जीवन बिताना पड़ता है ,
मां ,भाई ,बहन ,पापा का प्यार जाने कब दायरे में सिमट जाता है ,
उस घर आंगन भी जाने को सबसे इजाज़त लेना पड़ता है ,,
एक हाथ से कई रिश्ते छूटे, दूजा हाथ कई रिश्तों के लिए बढ़ाना पड़ता है ,, 
कभी मन से कभी बेमन सारे रिश्ते निभाने पड़ते है ,
किसी एक शख्स के खातिर पूरी जिंदगी बदलनी पड़ती  है ,
एक घर में बचपन बीता ,दूसरे में जीवन बिताना पड़ता है .....
एक घर में बचपन बीता,दूसरे में जीवन बिताना पड़ता है ......

©Pragya Karn

#nojoto #poem #writing g

13 Love

#inspirationalquotes #poetrycommunity #शायरी #quotestagram #poetrylovers #sad_shayari  White किसीने जगाया हमको
हमें लगा हम जाग गए
किसीने दिए स्वप्न नए
हम उनके ख्वाब में खो गए

किसीने थपथपाया हल्के से
हम उनको अपना मान गए
रंगने थे नए चित्र जीवन के
हम अपनें आकार भूल गए

सुन लिए संगीत नए
हम स्वर अपना भूल गए
कभी जरूरी होते थे हम
ख्वाबों के बाहर हो गये

- आतिश सोनार

©Atish Sonar
#TereHaathMein #writing #story #Hindi  Ek Roj Ek dafa tumse mulaqat hogi,
Tumhari bahon me wo meri aakhiri raat hogi >>>

©Manchali >>

Ek Roj 💔 #TereHaathMein #Love #story #Nojoto #writing #Poetry #Hindi

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तुम्हारे इंतजार में बैठे रहे। सावन की ये रिमझिम झड़ियां अनवरत बरसती रहीं, ये आंखें तुम्हें देखने के लिए न जाने कब तक तरसती रहीं । न तुम आए, और न तुम्हारे आने की आस रही, तुम जान नहीं सकते कि ये तन्हाइयां हमें किस क़दर खटकती रहीं। हम पहाड़ी पर उतरे हुए उन बादलों को देखे रहे, और साथ–साथ तुम्हारे इंतजार में बैठे रहे। झरने की भांति आंखों से झर–झर पानी झरता रहा, मिलन का एक ख़्वाब भी मन ही मन में तिरता रहा। हम झमाझम बारिश में खेत की मेढ़ में बैठे भीगते रहे, न जाने क्यों इन मोतियों सी बूंदों को देखकर भी भीतर से कुछ–कुछ खीझते रहे।। तुम्हारे आने की आस न होने पर भी हम क्रोध में वहीं पर ऐंठे रहे, बदन ठंड से कुढ़ने लगा फिर भी हम यूं ही बैठे रहे। न तुम आए और न तुम्हारे आने की आस रही, कुछ न रहा हमारे पास, बस तन्हाइयां ही साथ रहीं। कैसे बताएं कि हम उस हाल में कैसे रहे, ख़ुद को अपनी ही बाहों में पकड़े बैठे रहे। हम उस पार पहाड़ी से गिरते सफ़ेद झरने को देखे रहे, और साथ–साथ तुम्हारे इंतजार में बैठे रहे।। नदियों का कोलाहल न जाने क्यों शोर मचाता रहा, मेघों की गर्जन सुनते ही ये मन भी तुमसे मिलने के लिए जोर लगाता रहा। बैठे–बैठे इंतजार के सिवा और क्या हमारे हाथ में था? बारिश, एकांत, नदियों का कोलाहल, मेघों का गर्जन,सब हमारे साथ में था, बस एक तू ही था जो हमारे पास में न था। न जाने क्यों हम एकांत में भी वहीं पर ऐंठे रहे, हम पहाड़ी पर से बादलों को ऊपर उड़ते देखे रहे, और साथ साथ तुम्हारे इंतजार में बैठे रहे।। ©Deepa Ruwali

#कविता #thought #writing #writer #kavita  तुम्हारे इंतजार में बैठे रहे।

सावन की ये रिमझिम झड़ियां अनवरत बरसती रहीं,
ये आंखें तुम्हें देखने के लिए न जाने कब तक तरसती रहीं ।
न तुम आए, और न तुम्हारे आने की आस रही,
तुम जान नहीं सकते कि ये तन्हाइयां हमें किस क़दर खटकती रहीं।
  हम पहाड़ी पर उतरे हुए उन बादलों को देखे रहे,
  और साथ–साथ तुम्हारे इंतजार में बैठे रहे।

  
झरने की भांति आंखों से झर–झर पानी झरता रहा,
मिलन का एक ख़्वाब भी मन ही मन में तिरता रहा।
   हम झमाझम बारिश में खेत की मेढ़ में बैठे भीगते रहे,
न जाने क्यों इन मोतियों सी बूंदों को देखकर भी भीतर से कुछ–कुछ खीझते रहे।।
     तुम्हारे आने की आस न होने पर भी हम क्रोध में वहीं पर ऐंठे रहे,
 बदन ठंड से कुढ़ने लगा फिर भी हम यूं ही बैठे रहे।
  न तुम आए और न तुम्हारे आने की आस रही,
  कुछ न रहा हमारे पास, बस तन्हाइयां ही साथ रहीं।
     कैसे बताएं कि हम उस हाल में कैसे रहे,
  ख़ुद को अपनी ही बाहों में पकड़े बैठे रहे।
  हम उस पार पहाड़ी से गिरते सफ़ेद झरने को देखे रहे,
  और साथ–साथ तुम्हारे इंतजार में बैठे रहे।।


नदियों का कोलाहल न जाने क्यों शोर मचाता रहा,
  मेघों की गर्जन सुनते ही ये मन भी तुमसे मिलने के लिए जोर लगाता रहा।
  बैठे–बैठे इंतजार के सिवा और क्या हमारे हाथ में था?
  बारिश, एकांत, नदियों का कोलाहल, मेघों का गर्जन,सब हमारे साथ में था,
       बस एक तू ही था जो हमारे पास में न था।
 न जाने क्यों हम एकांत में भी वहीं पर ऐंठे रहे,
हम पहाड़ी पर से बादलों को ऊपर उड़ते देखे रहे,
और साथ साथ तुम्हारे इंतजार में बैठे रहे।।

©Deepa Ruwali

हमें अंत तक लड़ना होगा जीवन एक महासंग्राम है, हर हाल में इससे लड़ने का साहस करना होगा। हार का डर भीतर हरगिज़ न रहे, हमें अंत तक लड़ना होगा, ये अगर गमों का सागर बन सामने आए, तो हर हाल में इसे तरना होगा, भीरूता से परे होकर वीरता से कार्य करना होगा बुज़दिलों की भांति हारकर मरना कदापि उचित नहीं, हमें अंत तक लड़ना होगा।। न कोई संगी और न कोई साथी होगा, बस संग अपने साहस रहे, इतना ही काफ़ी होगा। हम लड़ने के लिए समर्थ हैं, हर क़दम पर हमारी इसी दृढ़ विश्वास की नींव को हिलाया जायेगा, इस सफ़र में आगे बढ़ते–बढ़ते हर दफा हमें खौफ़ का ज़हर भी पिलाया जायेगा। बावजूद इसके भी हमें कदापि न मरना होगा, हम बुज़दिल नहीं हैं, हमें अंत तक लड़ना होगा।। जीवन का ये सफ़र कई बार मन को भाएगा नहीं, भीतर से पराजित होने का डर भी जायेगा नहीं। किसी भी हाल में हमें पीछे नहीं मुड़ना होगा पूरी सामर्थ्य के साथ इस रास्ते पर आगे बढ़ना होगा। अन्यथा हम जीवन को व्यर्थ में चर रहे होंगे, जिंदा होकर भी पल-पल मर रहे होंगे। ऐसा न हमें करना होगा, हम बुज़दिल नहीं हैं, हमें अंत तक लड़ना होगा।। ©Deepa Ruwali

#कविता #traintrack #thought #writing #writer  हमें अंत तक लड़ना होगा 

  जीवन एक महासंग्राम है, 
      हर हाल में इससे लड़ने का साहस करना होगा।
 हार का डर भीतर हरगिज़ न रहे,
              हमें अंत तक लड़ना होगा,
ये अगर गमों का सागर बन सामने आए,
     तो हर हाल में इसे तरना होगा,
भीरूता से परे होकर वीरता से कार्य करना होगा
       बुज़दिलों की भांति हारकर मरना कदापि उचित नहीं,
हमें अंत तक लड़ना होगा।।

  न कोई संगी और न कोई साथी होगा,
  बस संग अपने साहस रहे, इतना ही काफ़ी होगा।
    हम लड़ने के लिए समर्थ हैं,
     हर क़दम पर हमारी इसी दृढ़ विश्वास की नींव को हिलाया जायेगा,
     इस सफ़र में आगे बढ़ते–बढ़ते हर दफा हमें खौफ़ का ज़हर भी पिलाया जायेगा।
     बावजूद इसके भी हमें कदापि न मरना होगा,
 हम बुज़दिल नहीं हैं,
 हमें अंत तक लड़ना होगा।।

   जीवन का ये सफ़र कई बार  मन को भाएगा नहीं,
         भीतर से पराजित होने का डर भी जायेगा नहीं।
किसी भी हाल में हमें पीछे नहीं मुड़ना होगा
        पूरी सामर्थ्य के साथ इस रास्ते पर आगे बढ़ना होगा।
अन्यथा हम जीवन को व्यर्थ में चर रहे होंगे,
   जिंदा होकर भी पल-पल मर रहे होंगे।
   ऐसा न हमें करना होगा, 
   हम  बुज़दिल नहीं हैं,
   हमें अंत तक लड़ना होगा।।

©Deepa Ruwali

दूर होकर भी करीब पाया तुम्हें ,, अब अपना नसीब बनाया तुम्हें,, गुस्सा होकर तुझसे, तुझसे ही बात करने को बेताब रहता है ये दिल ,, शायद तेरे हर लहजे में जादू है कोई,, जो दिल ने सबसे हसीन बताया तुम्हें ,, हाय, ये कातिल आंखें और चेहरा मासूम, शायद ,कुदरत ने फुरसत से बनाया तुम्हें दिल और धड़कन में रहेते हो तुम ,, एक पल भी नहीं भुलाया तुम्हें ,, मेरा खिलना-मुरझाना है तेरे हाथों में,, लो अपना दामन फैलाया तुम्हें ,, मेरे इन आंखों में तुम पढ़ लेना ,,, जो अब तक कह ना पाई तुम्हें ...... दूर होकर भी करीब पाया तुम्हे ,, अब अपना नसीब बनाया तुम्हे ...... ©Pragya Karn

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अब अपना नसीब बनाया तुम्हें,, 

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तुझसे ही बात करने को बेताब रहता है ये दिल ,, 

  शायद तेरे हर लहजे में जादू है कोई,,
जो दिल ने सबसे हसीन बताया तुम्हें ,,

हाय, ये कातिल आंखें और चेहरा मासूम,
शायद ,कुदरत ने फुरसत से बनाया तुम्हें

दिल और धड़कन में रहेते हो तुम ,,
एक पल भी नहीं भुलाया तुम्हें ,,

मेरा खिलना-मुरझाना है तेरे हाथों में,,
 लो अपना दामन फैलाया तुम्हें ,,

मेरे इन आंखों में तुम पढ़ लेना ,,,
 जो अब तक कह ना पाई तुम्हें ......

दूर होकर भी करीब पाया तुम्हे ,,
अब अपना नसीब बनाया तुम्हे ......

©Pragya Karn

White एक घर में बचपन बीता ,दूसरे में जीवन बिताना पड़ता है , मां ,भाई ,बहन ,पापा का प्यार जाने कब दायरे में सिमट जाता है , उस घर आंगन भी जाने को सबसे इजाज़त लेना पड़ता है ,, एक हाथ से कई रिश्ते छूटे, दूजा हाथ कई रिश्तों के लिए बढ़ाना पड़ता है ,, कभी मन से कभी बेमन सारे रिश्ते निभाने पड़ते है , किसी एक शख्स के खातिर पूरी जिंदगी बदलनी पड़ती है , एक घर में बचपन बीता ,दूसरे में जीवन बिताना पड़ता है ..... एक घर में बचपन बीता,दूसरे में जीवन बिताना पड़ता है ...... ©Pragya Karn

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मां ,भाई ,बहन ,पापा का प्यार जाने कब दायरे में सिमट जाता है ,
उस घर आंगन भी जाने को सबसे इजाज़त लेना पड़ता है ,,
एक हाथ से कई रिश्ते छूटे, दूजा हाथ कई रिश्तों के लिए बढ़ाना पड़ता है ,, 
कभी मन से कभी बेमन सारे रिश्ते निभाने पड़ते है ,
किसी एक शख्स के खातिर पूरी जिंदगी बदलनी पड़ती  है ,
एक घर में बचपन बीता ,दूसरे में जीवन बिताना पड़ता है .....
एक घर में बचपन बीता,दूसरे में जीवन बिताना पड़ता है ......

©Pragya Karn

#nojoto #poem #writing g

13 Love

#inspirationalquotes #poetrycommunity #शायरी #quotestagram #poetrylovers #sad_shayari  White किसीने जगाया हमको
हमें लगा हम जाग गए
किसीने दिए स्वप्न नए
हम उनके ख्वाब में खो गए

किसीने थपथपाया हल्के से
हम उनको अपना मान गए
रंगने थे नए चित्र जीवन के
हम अपनें आकार भूल गए

सुन लिए संगीत नए
हम स्वर अपना भूल गए
कभी जरूरी होते थे हम
ख्वाबों के बाहर हो गये

- आतिश सोनार

©Atish Sonar
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Tumhari bahon me wo meri aakhiri raat hogi >>>

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