Nehaashutosh gupta

Nehaashutosh gupta Lives in Delhi, Delhi, India

शब्दो का सारा खेल है,जो समझा उसको जीत मिली,ना समझा उसको मात, बस इतनी सी है बात।

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तू अपनी खूबियाँ ढूँढ, कमियाँ निकालने के लिए लोग है ना। सपने हमेशा ऊंचे देख, नीचा दिखाने के लिए लोग है ना खुद को रख बुलंद इतना, के तूफां कदम डगमगा ना सके रख निगाहें मंजिल की और के तेरे इरादे कोई हिला ना सके, बदलेंगी हाथो की लकीरें गर शिद्दत से तू चाहेगा, तेरी किस्मत कोई और नही तू खुद ही उसे बनाएगा, माना जिंदगी की डगर काँटों भरी है, माना राहो में तेरी मुश्किल बड़ी है गर छूना चाहता है क्षितिज तू, गिरकर संभलना आना होगा, ठोकरे भी खानी होंगी, खून का घूँट भी पीना होगा, अश्क हो आँखों मे भले ही लबो से मुस्कुराकर जीना होगा। तू रख निग़ाहें राहें मकाँ पर, पीछे खींचने के लिए लोग है ना। तू जश्न मना खुद अपनी कामयाबी का, तेरी खुशियों से जलने के लिए लोग है ना। नेहा गुप्ता ©Nehaashutosh gupta

#paper  तू अपनी खूबियाँ ढूँढ, कमियाँ निकालने के लिए 
लोग है ना।
सपने हमेशा ऊंचे देख, नीचा दिखाने के लिए
लोग है ना
खुद को रख बुलंद इतना, के तूफां कदम डगमगा ना सके
रख निगाहें मंजिल की और के तेरे इरादे कोई हिला ना सके,
बदलेंगी हाथो की लकीरें गर शिद्दत से तू चाहेगा,
तेरी किस्मत कोई और नही तू खुद ही उसे बनाएगा,
माना जिंदगी की डगर काँटों भरी है,
माना राहो में तेरी मुश्किल बड़ी है
गर छूना चाहता है क्षितिज तू,
गिरकर संभलना आना होगा,
ठोकरे भी खानी होंगी, खून का घूँट भी पीना होगा,
अश्क हो आँखों मे भले ही लबो से मुस्कुराकर जीना होगा।
तू रख निग़ाहें राहें मकाँ पर, पीछे खींचने के लिए
लोग है ना।
तू जश्न मना खुद अपनी कामयाबी का, तेरी खुशियों से जलने के लिए
लोग है ना।


नेहा गुप्ता

©Nehaashutosh gupta

#paper

9 Love

सुसंस्कृत, सुसमृद्ध, सुमधुर है अपनी हिंदी, सबकी जबां पर चढ़ जाये ऐसी सहज सरल है हिंदी, सब भाषाओं की बड़ी बहन है, एक सूत्र मे सबको पिरोती, संस्कृत भाषा से जन्मी है, संस्कृति को खुद मे संजोती, गीतों का आधार है हिंदी, भावो का संचार है हिंदी, संपर्क भाषा यह भारतवर्ष की, विकास का विस्तार है हिंदी। नेहा गुप्ता

#Hindidiwas  सुसंस्कृत, सुसमृद्ध, सुमधुर है अपनी हिंदी,
सबकी जबां पर चढ़ जाये ऐसी सहज सरल है हिंदी,
सब भाषाओं की बड़ी बहन है,
एक सूत्र मे सबको पिरोती,
संस्कृत भाषा से जन्मी है,
संस्कृति को खुद मे संजोती,
गीतों का आधार है हिंदी,
भावो का संचार है हिंदी,
संपर्क भाषा यह भारतवर्ष की,
विकास का विस्तार है हिंदी।

नेहा गुप्ता

#Hindidiwas

10 Love

मुझे चाहिए एक ऐसा साथ, जहाँ मैं, मैं बनकर रह सकूँ, और तुम, तुम ही बने रहो, दोनो मिलकर हम बन जाएं। ना तुम मुझे बदलने की कोशिश करो, ना मैं तुममे कुछ बदलने की साजिश करूँ, तुम धीर गंभीर सा रूप धरे रहो, मैं चंचल हिरणी सी मचलती फिरूँ, तुम व्यस्त रहो दुनिया के तौर तरीकों मे, मैं बेखबर सी अपने सपनो मे जीती रहूँ, ना मेरी कोई तुलना हो ना तुम्हारा कोई सानी हो, ना मुझे कोई चिंता हो ना तुम्हे कोई परेशानी हो, आज़ादी हो बोलने की, सोचने समझने की, बेबाकी से अपने दिल को तुम्हारे सामने खोलने की, ऐसा हमारा साथ हो जिसमें बंदिशें ना हो, व्यक्तिगत निजता खोने का कोई भय ना हो। नेहा गुप्ता

#ShiningInDark  मुझे चाहिए एक ऐसा साथ,
जहाँ मैं, मैं बनकर रह सकूँ,
और तुम, तुम ही बने रहो,
दोनो मिलकर हम बन जाएं।
ना तुम मुझे बदलने की कोशिश करो,
ना मैं तुममे कुछ बदलने की साजिश करूँ,
तुम धीर गंभीर सा रूप धरे रहो,
मैं चंचल हिरणी सी मचलती फिरूँ,
तुम व्यस्त रहो दुनिया के तौर तरीकों मे,
मैं बेखबर सी अपने सपनो मे जीती रहूँ,
ना मेरी कोई तुलना हो ना तुम्हारा कोई सानी हो,
ना मुझे कोई चिंता हो ना तुम्हे कोई परेशानी हो,
आज़ादी हो बोलने की, सोचने समझने की,
बेबाकी से अपने दिल को तुम्हारे सामने खोलने की,
ऐसा हमारा साथ हो जिसमें बंदिशें ना हो,
व्यक्तिगत निजता खोने का कोई भय ना हो।

नेहा गुप्ता

कहती हूँ रोज़ मैं हज़ारो बातें, सुनने वाले दाद भी तो देते है, मेरे विचारों से वो कभी कभी शायद प्रभावित भी होते है। अब थक चुकी हूं कहते कहते, अब बस चुपचाप सुनना चाहती हूं, चिड़ियों की मधुर चहचहाहट, कोयल की मीठी कूक, नदियों की कलकल, बारिश की झरझारहट,पत्तो की खरखराहट, उड़ना चाहती हूँ ऊंची उड़ान, जीना चाहती हूँ अपने अरमान, रखना चाहती हूँ अपनी छोटी खुशियों का खयाल. क्यों जिंदगी को खर्च करें सिर्फ औरो के लिए, अपने लिये कुछ पल जीने मे क्या बुराई है, दूसरों की खुशियों का ही बस क्यों ख्याल हो, अपनी खुशियों से भला क्या रुसवाई है। नेहा गुप्ता

#विचार #ShiningInDark  कहती हूँ रोज़ मैं हज़ारो बातें,
सुनने वाले दाद भी तो देते है,
मेरे विचारों से वो कभी कभी 
शायद प्रभावित भी होते है।

अब थक चुकी हूं कहते कहते,
अब बस चुपचाप सुनना चाहती हूं,
चिड़ियों की मधुर चहचहाहट,
कोयल की मीठी कूक, नदियों की कलकल,
बारिश की झरझारहट,पत्तो की खरखराहट,
उड़ना चाहती हूँ ऊंची उड़ान,
जीना चाहती हूँ अपने अरमान,
रखना चाहती हूँ अपनी छोटी खुशियों का खयाल.

क्यों जिंदगी को खर्च करें सिर्फ औरो के लिए,
अपने लिये कुछ पल जीने मे क्या बुराई है,
दूसरों की खुशियों का ही बस क्यों ख्याल हो,
अपनी खुशियों से भला क्या रुसवाई है।

नेहा गुप्ता

पैदा मुझे एक औरत ने किया, फिर भी बड़ा होकर उसकी आँखों मे आँखें डालकर, औरत कमजोर होती है ये कह सकता हूँ क्योंकि, मैं एक पुरूष हूँ। बचपन मे जिसके हिस्से का खाया, फिर भी बड़ा होकर जिसपर अपना हक जताया, बहन मेरे सहारे के बिना कुछ नही ये कह सकता हूँ, मैं वही एक पुरुष हूँ। बचपन से बुढापे तक जिस औरत को स्तंभ बनाया, जिसका सहारा लेकर मैं आगे ही आगे बढ़ता रहा, चोट लगी तो माँ के आँचल की छाया मिलती रही, कदम डगमगाए तो बहन के कंधों का सहारा मिला, माथे पर पड़ी शिकन कभी तो पत्नी ने सहलाया, मन हुआ उदास कभी तो बेटी के प्यार ने बहलाया, झूठी मर्दानगी मे उसके सम्मान को ठेस पहुँचाया, क्योंकि मैं एक पुरुष हूँ। नेहा गुप्ता

#विचार #shadesoflife  पैदा मुझे एक औरत ने किया,
फिर भी बड़ा होकर उसकी आँखों मे आँखें डालकर,
औरत कमजोर होती है ये कह सकता हूँ क्योंकि,
मैं एक पुरूष हूँ।
बचपन मे जिसके हिस्से का खाया,
फिर भी बड़ा होकर जिसपर अपना हक जताया,
बहन मेरे सहारे के बिना कुछ नही ये कह सकता हूँ,
मैं वही एक पुरुष हूँ।
बचपन से बुढापे तक जिस औरत को स्तंभ बनाया,
जिसका सहारा लेकर मैं आगे ही आगे बढ़ता रहा,
चोट लगी तो माँ के आँचल की छाया मिलती रही,
कदम डगमगाए तो बहन के कंधों का सहारा मिला,
माथे पर पड़ी शिकन कभी तो पत्नी ने सहलाया,
मन हुआ उदास कभी तो बेटी के प्यार ने बहलाया,
झूठी मर्दानगी मे उसके सम्मान को ठेस पहुँचाया,
क्योंकि मैं एक पुरुष हूँ।

नेहा गुप्ता

खास है इस सुबह की लाली, आम नही ये शाम है, इस रोज़ की हसरत मे जाने कितने वीर कुर्बान है। लहू से सिंचा है जश्ने आज़ादी के इस रोशन गुलशन को, जान गवाई जिसने हँसकर कैसे भूलें उस वीर शूरवीर को। जाने कितने महावीरों के खून का हमपर कर्ज़ है, उनकी अमानत की सलामती ही हमारा फ़र्ज़ है। हाँ मुझे अभिमान है अपने भारतीय होने पर, गुरुर है मुझे के मैंने इस पावन माटी मे जन्म लिया, जहां ना कोई भेदभाव है रंग हरा हो या केसरिया, हर धर्म जाति को हमने जहाँ दिल से अपना लिया। है दंभ बड़ा ही अपने उन निडर साहसी वीरो पर, सरहद की रक्षा करने का जिन्होंने डटकर प्रण लिया, है गर्व देश के उन सभी मेहनतकश किसानों पर, धूप बारिश कड़कती ठंड मे भी जिसने सबको अन्न दिया। विविधताओं से भरा हुआ है चप्पा चप्पा जिसका यहाँ, रंग बिरंगी वेशभूषा, मनभावन उत्सवों का माहौल कहाँ, जाने कितनी भाषा यहाँ पर कितनी ही मधुर बोलियाँ है, फिर भी अनदेखी एक डोर से बंधे हुए है सब लोग जहाँ। ऐसा है मेरा भारत जो विश्व गुरु कहलाता है, शून्य से शुरुआत कर जो शिर्ष तक ले जाता है, नित निरंतर जो सदा आगे ही बढ़ते जाता है, शक्तिशाली होकर भी जो अदब से सर झुकाता है, आँख दिखाने वालो को जो सबक बड़ा सिखलाता है, शरणागत हो जो तो उसको गोद मे अपने बिठाता है, ये भूमि है राम कृष्ण की जो युद्ध की कला सिखाते है, वहीं दूसरी और महावीर बुद्ध अहिंसा का पाठ पढ़ाते है, ये भूमि है गुरु नानक की जो मानवता की मूरत है, और वहीं कबीर तुलसी जो आध्यात्म की सूरत है, विकास के पथ पर बढ़ता जाए देश मेरा ये अरमान है, इसकी अस्मत पर मर मिटे ये देश ही मेरी पहचान है। नेहा गुप्ता

#independenceday2020  खास है इस सुबह की लाली, आम नही ये शाम है,
इस रोज़ की हसरत मे जाने कितने वीर कुर्बान है।
लहू से सिंचा है जश्ने आज़ादी के इस रोशन गुलशन को,
जान गवाई जिसने हँसकर कैसे भूलें उस वीर शूरवीर को।
जाने कितने महावीरों के खून का हमपर कर्ज़ है,
उनकी अमानत की सलामती ही हमारा फ़र्ज़ है।

हाँ मुझे अभिमान है अपने भारतीय होने पर,
गुरुर है मुझे के मैंने इस पावन माटी मे जन्म लिया,
जहां ना कोई भेदभाव है रंग हरा हो या केसरिया,
हर धर्म जाति को हमने जहाँ दिल से अपना लिया।

है दंभ बड़ा ही अपने उन निडर साहसी वीरो पर,
सरहद की रक्षा करने का जिन्होंने डटकर प्रण लिया,
है गर्व देश के उन सभी मेहनतकश किसानों पर,
धूप बारिश कड़कती ठंड मे भी जिसने सबको अन्न दिया।

विविधताओं से भरा हुआ है चप्पा चप्पा जिसका यहाँ,
रंग बिरंगी वेशभूषा, मनभावन उत्सवों का माहौल कहाँ,
जाने कितनी भाषा यहाँ पर कितनी ही मधुर बोलियाँ है,
फिर भी अनदेखी एक डोर से बंधे हुए है सब लोग जहाँ।

ऐसा है मेरा भारत जो विश्व गुरु कहलाता है,
शून्य से शुरुआत कर जो शिर्ष तक ले जाता है,
नित निरंतर जो सदा आगे ही बढ़ते जाता है,
शक्तिशाली होकर भी जो अदब से सर झुकाता है,
आँख दिखाने वालो को जो सबक बड़ा सिखलाता है,
शरणागत हो जो तो उसको गोद मे अपने बिठाता है,
ये भूमि है राम कृष्ण की जो युद्ध की कला सिखाते है,
वहीं दूसरी और महावीर बुद्ध अहिंसा का पाठ पढ़ाते है,
ये भूमि है गुरु नानक की जो मानवता की मूरत है,
और वहीं कबीर तुलसी जो आध्यात्म की सूरत है,

विकास के पथ पर बढ़ता जाए देश मेरा ये अरमान है,
इसकी अस्मत पर मर मिटे ये देश ही मेरी पहचान है। 

नेहा गुप्ता
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