Madhusudan Shrivastava

Madhusudan Shrivastava

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#कविता  तरू पल्लव जड़ फल फूलों अरु   शाखाओं पर पुष्पित राम। 
दृश्य नहीं हैं किंतु सृष्टि में    कण-कण घट-घट व्यापित राम। 

राज महल के भोग छोड़ कर     मर्यादा को मान दिये। 
कुल मर्यादा अरु समाज के     मूल्यों का वो ज्ञान दिये। 
विधि लेती है कठिन परीक्षा,     नहीं थे इससे वंचित राम। 

दृश्य नहीं हैं किंतु सृष्टि में     कण-कण घट-घट व्यापित राम।। 

शिव के अप्रतिम भक्त राम तो    राम-भक्त भोले शंकर। 
एक दूजे की शक्ति हैं दोनो      रघुनंदन अरु रामेश्वर। 
रघुकुल भूषण सूर्यवंश मणि    सियापति शिव पूजित राम।

दृश्य नहीं हैं किंतु सृष्टि में    कण-कण घट-घट व्यापित राम ।। 

साथी धर्म निभाने को वो,    शक्ति बाण भी सह लेते। 
जीत के लंका लंकापति से,   राज्य विभिषण को देते। 
देवों के हैं देव किंतु,    हैं सहज सरल अनुशासित राम। 

दृश्य नहीं हैं किंतु सृष्टि में    कण-कण घट-घट व्यापित राम।। 

सतयुग, त्रेता, द्वापर, कलियुगराम   के ग्रंथों का सार हैं राम। 
भाषा भाष्य विभाषा हैं वो    परिभाषा के पार हैं राम। 
किन्तु जगत में समय समय पर   किये गए परिभाषित राम।

दृश्य नहीं हैं किंतु सृष्टि में    कण-कण घट-घट व्यापित राम ।। 

हे सृष्टा, हे सृष्टि नियंता,  तुम ही नियम, नियामक भी। 
संहारक हो दुष्टों का तुम,   तुम ही जगत के पालक भी। 
सुर नर मुनि के श्रेष्ठ आचरण   से सज्जित मर्यादित राम। 

दृश्य नहीं हैं किंतु सृष्टि में   कण-कण घट-घट व्यापित राम।। 
जन मानस के रोम रोम अरु   हिय पर सबके अंकित राम।

©Madhusudan Shrivastava

राम राम राम राम राम @Sircastic Saurabh @it's_ficklymoonlight Sudha Tripathi @poetess Pratima Upadhyay

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मेरा  तन है यहाँ  पर  मन नहीं  है। मधु  है, वन है, पर मधुवन नहीं है। तेरा दर  छोड़ कर मैं  जा  रहा हूँ, मगर जाने  को, मेरा  मन नहीं  है। मेरे  किरदार की  है  ये ग़मक जां के मेरे  पास  तो   चंदन  नहीं  है। थपेड़े लू के ही मिलते हैं मुझको मेरी इस ज़ीस्त में सावन नहीं है। वफ़ा है  खूब पर इसके सिवा अब 'मधु' के  पास   कोई धन नहीं है। ©Madhusudan Shrivastava

#शायरी #delicate  मेरा  तन है यहाँ  पर  मन नहीं  है।
मधु  है, वन है, पर मधुवन नहीं है।

तेरा दर  छोड़ कर मैं  जा  रहा हूँ,
मगर जाने  को, मेरा  मन नहीं  है।

मेरे  किरदार की  है  ये ग़मक जां
के मेरे  पास  तो   चंदन  नहीं  है।

थपेड़े लू के ही मिलते हैं मुझको
मेरी इस ज़ीस्त में सावन नहीं है। 

वफ़ा है  खूब पर इसके सिवा अब 
'मधु' के  पास   कोई धन नहीं है।

©Madhusudan Shrivastava

#delicate नहीं है@Chocolate

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#शायरी

मोहब्बत का आला अदब लिख रहा हूँ जो लिखना था पहले वो अब लिख रहा हूँ नहीं कुछ मैं उनका, मेरी बदनसीबी मगर मैं उन्हें अपना सब लिख रहा हूँ @Kumar Shaurya @Ashish @Chocolate @MM Mumtaz @Rakhee ki kalam se

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Nojoto Got Talent @Pyare ji https://nojoto.onelink.me/Wxeg/3mqu3cb9 Kundan Dubey ji https://nojoto.onelink.me/Wxeg/kwymhbso

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